Basant Panchami Visarjan Rules: बसंत पंचमी पर सरस्वती मूर्ति का विसर्जन कब करें? जानिए धर्मग्रंथों में क्या है सही नियम
मां सरस्वती की मूर्ति कब विसर्जन करना चाहिए
Basant Panchami Visarjan Rules: आज ज्ञान की देवी माता सरस्वती का दिन है, जिसे बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है. हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं. आज यानी बसंत पंचमी के अवसर पर लोग अपने घरों में मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. वहीं कई लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या मूर्ति का विसर्जन आज ही कर देना शुभ होता है या फिर कुछ दिनों तक उसे घर में रखना उचित माना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस विषय में धर्मग्रंथों में क्या कहा गया है.
मूर्ति विसर्जन कब करना चाहिए?
- हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति बसंत पंचमी के अगले दिन यानी षष्ठी तिथि को विसर्जन करना शुभ माना गया है.
- वहीं शास्त्रों में कहा गया है कि अगले दिन मूर्ति को पूरे विधि-विधान के साथ विसर्जन करना चाहिए, ऐसा करने से मां की कृपया जीवन भर बनी रहेगी और जीवन मंगलमय होगा.
- मान्यताओं के अनुसार, पूजा का समय सीमित होता है, इसलिए मूर्ति को लंबे समय तक घर में रखना शुभ नहीं माना जाता है. मूर्ति को स्थापना के अलगे दिन विसर्जित करना जरूरी होता है.
- अगर अगले दिन मूर्ति को विसर्जित नहीं की गई तो इससे मां नाराज हो जाएंगी और उनका आशीर्वाद आपको नहीं मिल पाएगा.
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मूर्ति विसर्जन करने की विधि क्या है?
- शास्त्रों के अनुसार, मूर्ति विसर्जन से पहले मां सरस्वती की अंतिम पूजा करनी चाहिए.
- अंतिम पूजा के समय मां सरस्वती को अगरबत्ती, धूप, फूल और भोग चढ़ाएं. यदि आपसे कोई अनजाने में गलती हो गई है, तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना करें.
- इसके बाद पूजा कलश के पानी को लेकर पूरे घर और आंगन में छिड़काव करें. ऐसा करने से घर में शांति और मां का आशीर्वाद अनंत तक बना रहता है.
- फिर मां सरस्वती की मूर्ति को एक अच्छे और साफ कपड़े में लपेटें और किसी पवित्र पात्र में पानी भरकर विसर्जन करें.
- मूर्ति विसर्जन करते समय मन से “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें.