‘प्रशासन ने मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन किया…’, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरीं उमा भारती

Uma Bharti On Swami Avimukteshwaranand: शंकराचार्य विवाद मामले में बीजेपी नेता उमा भारती ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है. उन्होंने प्रशासन पर मर्यादा और अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरीं बीजेपी नेता उमा भारती

Uma Bharti: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब भारतीय जनता पार्टी की सीनियर नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती ने शंकराचार्य का समर्थन किया है. उन्होंने प्रशासन पर गलत व्यवहार करने का आरोप लगाया है.

बीजेपी नेता उमा भारती ने क्या कहा?

सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करके बीजेपी की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने लिखा कि मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है.

‘स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर NSA लगना चाहिए’

वहीं, अयोध्या के छावनी धाम के परमहंस महाराज ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सतुआ बाबा ने माघ मेले को बदनाम कर दिया है. दोनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगना चाहिए.

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क्या है पूरा मामला?

  • उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला का आयोजन किया जा रहा है.
  • 18 जनवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी से गंगा स्नान के लिए जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें पालकी के स्थान पर पैदल संगम नोज तक जाने के लिए कहा.
  • इस बात पर पुलिस और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों में झड़प हो गई. बीच-बचाव के बाद किसी तरह मामला सुलझा.
  • माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दो नोटिस दिए. पहला नोटिस दिया गया, जिसमें पूछा गया था कि आप शंकराचार्य हैं इसका प्रमाण दीजिए. वहीं , दूसरा नोटिस मौनी अमावस्या के दिन हंगामा को लेकर दिया गया था.
  • इसके साथ ही प्रशासन ने चेतावनी देते हुए कहा था कि उन्हें माघ मेला से प्रतिबंधित किया जा सकता है. शंकराचार्य की ओर से दोनों नोटिस का जवाब दिया गया था.

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