भिखमंगे पाकिस्तान की निकल गई हेकड़ी! शहबाज शरीफ ने कबूला- कर्ज के लिए हाथ फैलाया, सिर झुकाया और शर्मसार हुआ

Pakistan: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के टॉप एक्सपोर्टर्स को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक बदहाली को लेकर बड़ा खुलासा किया है.
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर

Pakistan News: पाकिस्तान की हालत बद से बदतर होती जा रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इसे स्वीकार्य किया है कि बदहाल स्थिति की वजह से उन्हें और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को ‘दोस्त देशों के सामने भीख मांगनी पड़ी’. इतना ही पीएम ने कहा कि कई बार तो कर्ज लेने की शर्तें काफी अनुचित होती हैं लेकिन क्या करें मजबूरी में पाकिस्तान को अपनी प्रतिष्ठा से समझौता करना पड़ता है, कई बार ऐसा किया गया. हालांकि पीएम शहबाज इससे पहले भी कई बार बोल चुके हैं कि वे दुनिया में भीख का कटोरा लेकर घूमना नहीं चाहते हैं. पाकिस्तान का दिनों-दिन कर्ज बढ़ता ही जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के ऊपर दिसंबर 2025 तक कुल विदेश कर्ज लगभग 52.366 बिलियन अमेरिकी डॉलर है.

क्या बोले पीएम शहबाज?

  • प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के टॉप एक्सपोर्टर्स को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक बदहाली को लेकर बड़ा खुलासा किया है. शहबाज यह बताते हुए भावुक हो गए और बोले कि मैं आपको कैसे बताऊं समझ नहीं आ रहा है.
  • हमने कई दोस्त मुल्कों के दर पर जाकर कर्ज के लिए गिड़गिड़ाया. हालांकि उन्होंने हमें मायूस तो नहीं किया लेकिन जो कर्ज लेने जाता है, अक्सर उसका सिर नीचे की ओर झुका रहता है. उनकी यह बयानबाजी पाकिस्तान की बदहाली हालत को दिखाती है.

कर्ज के लिए हाथ फैलाया, सिर झुकाया

शहबाज ने कहा कि कई बार कर्ज लेने के लिए चुपचाप कई देशों के पास झुके सिर के साथ मदद की गुहार लगाई. वित्तीय संकट इतना गहरा था कि बार-बार विदेशी दौरों पर जाकर कर्ज मांगना पड़ा. कर्ज लेने के कई बार नियम कुछ अनुचित भी होते हैं इस दौरान पाकिस्तान को अपनी प्रतिष्ठा से समझौता करना पड़ता है. कई दफा ऐसे किया गया. कई बार तो शर्तें इतनी ज्यादा रख दी जाती हैं कि उनका बोझ उठाना नामुमकिन होता है. इसके बावजूद भी समझौता करना पड़ता है.

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पीएम शहबाज ने खुद किया कबूलनामा

पाकिस्तानी पीएम शहबाज ने यह कबूलनामा उस दौरान किया है, जब कोई सहयोगी देश मदद की नहीं बल्कि व्यापार और निवेश की उम्मीद कर रहे हैं. शहबाज का बयान देश को असहज करने वाला है. हालांकि पाकिस्तान लगातार अपनी क्षमता से ज्यादा कर्ज लेता ही जा रहा है. उस पर कर्ज चुकाने का बोझ इतना बढ़ गया है कि आए दिन कई देशों के सामने मदद की गुहार लगाता रहता है.

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