Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी पर इन मंत्रों का करें जाप, दूर होंगे सारे कष्ट

Sankashti Chaturthi 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है, जिसमें गणेश जी के 'द्विजप्रिय' स्वरूप की पूजा होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत लोगों के जीवन से सभी दुखों और बाधाओं को समाप्त करने वाला माना जाता है, इसीलिए इसे संकटों को हरने वाली 'चतुर्थी' भी कहते हैं.
Sankashti Chaturthi 2026

संकष्टी चतुर्थी पर मंत्रों का जाप करें

Sankashti Chaturthi 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, जो इस साल आज यानी 5 फरवरी 2026 को है. यह पवित्र दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात के समय में चंद्रोदय के पश्चात चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही अपना व्रत पूरा करते हैं. प्रथम पूज्य देवकी आराधना का यह पर्व जीवन के समस्त संकटों को दूर करने वाला माना गया है.

संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय क्या है?

ज्योतिषियों के अनुसार, आज द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन में चंद्रमा रात 9 बजकर 37 मिनट पर उदय होंगे. हालांकि, शहर और मौसम में बदलाव के कारण चंद्रोदय के समय में कुछ मिनट का अंतर देखा जा सकता है. मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा का दर्शन करके और अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत तोड़ें. ऐसा करने से जीवन में सुख शांति बनी रहती है.

संकष्टी चतुर्थी व्रत का क्या महत्व है?

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है, जिसमें गणेश जी के ‘द्विजप्रिय’ स्वरूप की पूजा होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत लोगों के जीवन से सभी दुखों और बाधाओं को समाप्त करने वाला माना जाता है. इसीलिए इसे संकटों को हरने वाली ‘चतुर्थी’ भी कहते हैं. श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से भक्तों की जटिल से जटिल समस्याएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. इस पवित्र अवसर पर विघ्नहर्ता का आशीर्वाद प्राप्त करने और कष्टों से मुक्ति पाने के लिए कुछ उपायों के साथ-साथ विशेष मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ होता है.

संकष्टी चतुर्थी पर किन मंत्रों का जाप करें?

  • श्री गणेशाय नमः
  • ऊँ विघ्नेश्वराय नमः
  • वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:. निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा.
  • ‘ॐ नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा.’
  • ‘ॐ वक्रतुण्डाय हुं.’
  • ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौंगं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा.’
  • सिद्ध लक्ष्मी मनोरहप्रियाय नमः. ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये. वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:.
  • विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं.
  • नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते.
  • भक्तार्तिनाशनपराय गनेशाश्वराय, सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय.
  • विद्याधराय विकटाय च वामनाय , भक्त प्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते.

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गणेश वंदना मंत्र का जाप करें

  • इसके अलावा, इस दौरान गणेश वंदना का भी बहुत ज्यादा महत्व होता है. आप इस गणेश वंदना का जाप कर सकते हैं.
  • गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्.
  • उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्.

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