‘बिना पेनिट्रेशन रेप नहीं, सिर्फ रेप का प्रयास….’, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, आरोपी की सजा की आधी

CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 20 साल पुराने रेप मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी की सजा को आधा कर दिया है. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप के लिए 7 साल के कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे रेप के प्रयास में बदलते हुए सजा को साढ़े 3 साल कर दिया.
CG High Court (File Photo)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 20 साल पुराने रेप मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी की सजा को आधा कर दिया है. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप के लिए 7 साल के कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे रेप के प्रयास में बदलते हुए सजा को साढ़े 3 साल कर दिया. कोर्ट ने कहा, पेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ, इसलिए यह रेप नहीं बल्कि रेप का प्रयास है.

क्या है पूरा मामला?

  • यह पूरा मामला साल 2004 का है, जब एक आरोपी ने एक युवती को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती की और उसे कमरे में बंधक बनाकर उसके हाथ-पैर बांध दिए थे.
  • साल 2005 में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने आरोपी को दोषी करार देते हुए धारा 376(1) के तहत 7 साल के कठोर कारावास और धारा 342 के तहत 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी.
  • इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने सुनवाई की.

बिना पेनिट्रेशन रेप नहीं, सिर्फ रेप का प्रयास – हाई कोर्ट

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि पीड़िता के बयानों में ‘प्रवेश’ (Penetration) को लेकर विरोधाभास था और मेडिकल रिपोर्ट में भी ‘हाइमेन’ सुरक्षित पाया गया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि कानूनन बलात्कार के लिए ‘पूर्ण प्रवेश’ अनिवार्य नहीं है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि पूर्ण दुष्कर्म हुआ है.

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आरोपी की सजा की आधी

हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए आरोपी की सजा को धारा 376(1) से बदलकर धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास) के तहत 3 साल 6 माह कर दिया. Penetration in Rape Law वहीं, बंधक बनाने की सजा (धारा 342) को यथावत रखा गया है और दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. कोर्ट ने आरोपी के जमानत बांड निरस्त करते हुए उसे दो महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का सख्त निर्देश दिया है, अन्यथा पुलिस उसे गिरफ्तार कर शेष सजा पूरी कराएगी। के कारण इसे तकनीकी रूप से बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.

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