ईरान पर अमेरिका करेगा हमला? ट्रंप का ‘टू-फेज प्लान’ तैयार! नहीं माने खामेनेई तो क्या होगा

US-Iran Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि ईरान हमारी बातों पर सहमति जताए. ट्रंप की मांग है कि ईरान सारा संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर भेजे और लंबी दूरी की मिसाइलों के भंडार को कम करे.
Donald trump And Khamenei

डोनाल्ड ट्रंप और खामेनेई

US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच एक अंदरखाने में सबकुछ सही नहीं चल रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए ठप करने का विचार कर रहे हैं. इसके लिए ‘टू-फेज’ (दो चरणों) में सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है. यहां जानें पहले और दूसरे चरण की क्या योजना है?

पहले चरण में क्या होगा?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका पहले चरण की योजना के तहत, ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों या सरकारी केंद्रों पर ‘सीमित हवाई हमले’ कर सकता है. ट्रंप इसके माध्यम से ईरानी सरकार को यह बताना चाहते हैं कि हम सिर्फ धमकी नहीं दे रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के सूत्रों की मानें तो यह हमला बहुत जल्द होने की संभावना है.

दूसरे चरण में क्या?

ट्रंप पहले चरण के हमले के माध्यम से ईरान को झुकाने का प्रयास करते हैं, लेकिन इसके बावजूद अगर ईरानी सरकार ट्रंप के आगे झुकने को तैयार नहीं और उनकी बातों पर असहमति जताती है, तो वे दूसरे चरण की मंजूरी दे देंगे. इसमें बड़े हमले किए जाएंगे, जिसमें काफी नुकसान की उम्मीद है. इस हमले के दौरान ट्रंप सरकार ईरानी की पूरी सैन्य मशीनरी और शासन सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा. इस दौरान ट्रंप का प्लान ईरानी शासन को उखाड़ फेकने का है.

ट्रंप की क्या हैं मांगें?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि ईरान हमारी बातों पर सहमति जताए. ट्रंप की मांग है कि ईरान सारा संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर भेजे और लंबी दूरी की मिसाइलों के भंडार को कम करे. इसके अलावा ट्रंप चाहते हैं कि ईरान हिजाबुल्लाह व हूती जैसे संगठनों का समर्थन बंद करे. अगर ईरान ऐसा नहीं करता है तो उस पर कार्रवाई जरूर की जाएगी.

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दरअसल, अभी कुछ दिनों पहले ही व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में शीर्ष सलाहकारों के साथ बैठक हुई थी. इस बैठक में ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में भी बड़े संकेत दिए थे. ट्रंप ने ईरान को साफ संदेश देते हुए कहा कि उन्हें समझौता करना ही होगा, वरना बहुत बुरा होगा. इसके अलावा 10 से 15 दिनों के अंदर कुछ बड़ा करने के भी संकेत दिए हैं. हालांकि, ईरान सरकार ने अभी तक ट्रंप की शर्तों पर अपनी सहमति नहीं जताई है. अब देखना यह होगा कि आखिर दोनों देश क्या निर्णय लेते हैं.

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