महाराष्ट्र: गढ़चिरौली के 68 गांव बने बाल विवाह-मुक्त, गांव वालों के संकल्प ने बदली तस्वीर
महाराष्ट्र के कई गांव बाल विवाह मुक्त
Maharashtra News: देश में भले ही बाल विवाह को लेकर कठोर कानून हैं. ये तय किया गया कि बाल अवस्था में किसी का भी विवाह नहीं कराया जाएगा. इसके बाद भी देश में कई ऐसे इलाके मौजूद हैं, जहां बाल विवाह आज भी होते हैं. महाराष्ट्र भी इस लिस्ट में शामिल है. हालांकि इस प्रथा को खत्म करने के कई प्रयास भी किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में गढ़चिरौली के 68 गांव अब बाल विवाह मुक्त घोषित हो चुके हैं. इसमें ग्राम सभाओं के प्रस्ताव, ग्राम सुरक्षा समितियों की सक्रियता और सालों से चल रही जमीनी जागरूकता मुहिम का बड़ा योगदान है.
‘स्पर्श’ NGO में फील्ड स्टाफ के तौर पर काम करने वाली ममता पिछले कई सालों से लोगों को जागरूक करने का काम कर रही हैं. ममता रामटेके जैसी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को समझाती हैं कि कम उम्र में शादी करने से लड़कियों की सेहत पर कितना गंभीर असर पड़ता है. वह कई अन्य साथियों के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं.
कैसे गांव बनता है बाल विवाह मुक्त
इन गांवों को बाल विवाह-मुक्त घोषित करने के लिए सख्त शर्तें पूरी करनी होती हैं. 2014 के सरकारी निर्देश के अनुसार हर गांव में ‘ग्राम बाल सुरक्षा समिति’ का गठन जरूरी है, जो बाल विवाह, बाल श्रम और बच्चों के शोषण जैसे मामलों पर निगरानी रखती है और नियमित बैठकें करती है.
इसके अलावा 2022 में गांव स्तर पर शादी पंजीकरण की व्यवस्था शुरू की गई, जिसमें दूल्हा-दुल्हन की उम्र और अन्य जानकारी दर्ज की जाती है. किसी गांव को बाल विवाह-मुक्त घोषित करने के लिए यह जरूरी है कि वहां कम से कम 5 साल तक कोई बाल विवाह न हुआ हो.
हजारों लोगों ने ली बाल विवाह के खिलाफ शपथ
टीम को जब भी कहीं बाल विवाह की आशंका होती है, तो कार्यकर्ता और समिति के सदस्य परिवार से मिलकर उन्हें समझाते हैं और लिखित वचन लेते हैं. इसी प्रयास के चलते इस साल करीब 350 बाल विवाह रोके जा चुके हैं. इस अभियान में हजारों लोग जुड़े हैं. 84 हजार से अधिक लोगों ने बाल विवाह के खिलाफ शपथ ली है. बड़ी संख्या में लोग जागरूकता रैलियों में शामिल हुए हैं. हालांकि 68 गांवों ने यह उपलब्धि हासिल कर ली है, लेकिन जिले के सैकड़ों गांवों में अभी भी काम जारी है.
ममता रामटेके और उनकी टीम के लिए यह मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है. वे लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं, ताकि पूरा जिला बाल विवाह-मुक्त बन सके. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में पूरा जिला बाल विवाह मुक्त होगा.
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