‘पत्नी को रसोई में जाने से रोकना सिर्फ घरेलू विवाद नहीं, इंसान की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का उल्लंघन,’ बॉम्बे HC का बड़ा फैसला

Bombay High Court: हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी महिला को लगातार परेशान करना, उसके कहीं आने-जाने पर रोक लगाना और घर की बुनियादी जरूरतों से बंचित रखना मानसिक क्रूरता के उदाहरण हैं.
Bombay High Court

बॉम्बे हाई कोर्ट

Bombay High Court: घरेलू हिंसा की खबरें देशभर में लगभग प्रतिदिन आती रहती हैं. महाराष्ट्र की एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके घर वाले किचन में नहीं जाने देते. हमारा खाना पकाने का अधिकार छीन लिया गया. इस मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि पत्नी को रसोई में जाने से रोकना और उसे बाहर से खाना लाने के लिए मजबूर करना सिर्फ घरेलू विवाद नहीं है, बल्कि यह मानसिक यातना का एक रूप है, जो उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाता है. इसके साथ ही कोर्ट ने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया. जानें कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी महिला को लगातार परेशान करना, उसके कहीं आने-जाने पर रोक लगाना और घर की बुनियादी जरूरतों से बंचित रखना मानसिक क्रूरता के उदाहरण हैं.

महिला ने क्या लगाए थे आरोप?

महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया था कि उसे किचन में जाने से रोका जाता है. जिसकी वजह से खाना खाने के लिए बाहर जाना पड़ता है. घर वालों ने मजबूर कर दिया. इतना ही नहीं घर से निकालकर गहने भी बाहर फेंक दिए और तलाक लेने के लिए दबाव बनाया. घर पर सिर्फ और सिर्फ एक नौकरानी के तरह बर्ताव किया गया. यह सब सास के कहने पर किया गया. महिला की शिकायत पर कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सुनवाई की है.

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पति ने दी सफाई?

पत्नि के आरोपों पर पति ने सफाई देते हुए कहा कि तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी. जिसका बदला लेने के लिए झूठी शिकायत दर्ज कराई गई. हालांकि न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि विवाहित जीवन में रसोई में प्रवेश करने के अधिकार से वंचित करना केवल एक ‘घरेलू नियम’ नहीं है, बल्कि यह किसी इंसान की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का उल्लंघन है. हालांकि, सास के ऊपर लगे आरोपों को कोर्ट ने खारिज कर दिया.

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