भोपाल में वेस्टर्न बाईपास पर घमासान, जमीन खरीद में IAS-IPS अधिकारियों जमीन खरीदारी पर उठे सवाल

Madhya Pradesh Land Controversy: मध्‍य प्रदेश की राजधानी में इन दिनों आईएस और आईपीएमस अफ्सर एक जमीन खरीदारी को लेकर चर्चा में हैं. इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.
जमीन के साथ अध‍िकार‍ियों ने कर द‍िया खेला

जमीन के साथ अध‍िकार‍ियों ने कर द‍िया खेला

IAS IPS Land Scam: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बनने वाले 3200 करोड़ रुपये के वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. आरोप है कि देशभर के करीब 50 IAS और IPS अधिकारियों ने उस इलाके में पहले ही जमीन खरीद ली थी, जहां बाद में बाईपास का रूट तय किया गया. अब इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.

भोपाल के कोलार इलाके के गुराड़ी घाट गांव में साल 2022 में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने एक ही दिन कृषि भूमि खरीदी थी. दावा किया जा रहा है कि जमीन खरीदने के करीब 16 महीने बाद सरकार ने उसी क्षेत्र से गुजरने वाले वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी.इसके बाद जमीन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया और जो जमीन पहले करीब 5 से 7 करोड़ रुपये की थी, उसकी कीमत अब 55 से 65 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है.

संगठन ने की अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

मामले को लेकर ‘सिस्टम परिवर्तन अभियान’ नाम के संगठन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.संगठन का आरोप है कि बाईपास का अलाइनमेंट कई बार बदला गया और हर बार सड़क का रूट उन्हीं जमीनों के आसपास पहुंच गया, जिन्हें अफसरों ने खरीदा था.  इसके साथ ही कृषि भूमि को बाद में आवासीय श्रेणी में बदले जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं.

अधिकारियों ने दी सफाई

विवाद के बीच कुछ अधिकारियों ने सफाई भी दी है. उनका कहना है कि जमीन की खरीद पूरी तरह नियमों के तहत हुई थी और उस समय बाईपास प्रोजेक्ट की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी. सरकार की ओर से भी कहा गया है कि पर्यावरणीय कारणों और रातापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र की वजह से बाईपास का रूट बदलना जरूरी था.

अब इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष सरकार और अफसरशाही पर सवाल उठा रहा है. राजनीतिक दलों का कहना है कि अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रदेश का बड़ा “लैंड और प्लानिंग स्कैम” साबित हो सकता है. 

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