Dhar: भोजशाला में चुपके से स्थापित हुई मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा! ASI ने तुंरत हटाया, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा
धार की संवेदनशील इमारत भोजशाला परिसर में शनिवार को हुए एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने प्रशासन, पुरातत्व विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. किसी अज्ञात व्यक्ति अथवा समूह द्वारा भोजशाला के अंदर वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा स्थापित कर दी गई. आश्चर्यजनक बात ये रही कि, परिसर में तैनात सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी.
एएसआई ने प्रतिमा को हटवा
मामला एएसआई के संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रतिमा को हटवा दिया. वही भोज उत्सव समिति ने मूर्ति रखने की घटना से खुद को अलग बताते हुए मामले से किनारा कर लिया जिसके बाद सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मूर्ति अंदर कैसे पहुंची? आपको बता दे कि भोजशाला के बाहर परिसर में पुलिस चौकी और अंदर एएसआई के सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं, इसके बावजूद अष्टधातु की मूर्ति अंदर जाना सुरक्षा पर कई सवाल खड़े करता हैं.
हाईकोर्ट ने भोजशाला को बताया सरस्वती मंदिर
घटना ऐसे समय सामने आई, जब हाल ही में उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला को सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने और मुख्यमंत्री द्वारा यहां ‘सरस्वती लोक’ एवं राजा भोज शोध संस्थान की घोषणा के बाद परिसर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है. ऐसे माहौल में प्रतिमा की अचानक स्थापना और फिर उसे हटाए जाने की घटना ने नई बहस छेड़ दी है.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद से बढ़ा दी गई थी सुरक्षा
बता दें कि भोजशाला में हमेशा से ही सुरक्षा व्यवस्था चौकस रहती है लेकिन जब से जब हाई कोर्ट ने भोजशाला पर फैसला सुना दिया है तब से यहां सुरक्षा और बढ़ा दी गई है. हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया था और भोजशाला को मां वाग्यादेवी का प्राचीन मंदिर बताया था. इस फैसले के बाद संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के और कड़े इंतजाम कर दिए गए थे. स्थानीय पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास सुरक्षा का पूरे परिसर की सुरक्षआ का जिम्मा है.