Barwani News: सड़क नहीं मिली तो खुद बन गए मांझी, बड़वानी के आदिवासियों ने पहाड़ काटकर बनाई राह
पहाड़ काटकर सड़क बना रहे आदिवासी
इनपुट– सचिन राठौर
Dashrath Manjhi Style Hill Cutting: सरकार से वर्षों तक सड़क की मांग करने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला तो बड़वानी जिले के एक दूरस्थ आदिवासी फलिए के लोगों ने खुद ही सड़क बनाने का बीड़ा उठा लिया. गर्भवती महिलाओं, बीमारों और बुजुर्गों को वर्षों तक झोली और खाट के सहारे ऊबड़-खाबड़ रास्तों से अस्पताल और मुख्य सड़क तक पहुंचाना उनकी मजबूरी थी. अब ग्रामीण फावड़े, गैंती और अपने सीमित संसाधनों के सहारे पहाड़ और जंगल के बीच सड़क निर्माण में जुट गए हैं.
चंदा जुटा कर सड़क बना रहे ग्रामीण
उबादगढ़ ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले खोड़ी पलास फलिया के ग्रामीणों ने खराब सड़क व्यवस्था और अधूरे सरकारी वादों से तंग आकर सामूहिक रूप से करीब 10-10 हजार रुपये का योगदान दिया. इस राशि से जेसीबी मशीन किराए पर लेकर उन्होंने सड़क निर्माण कार्य शुरू किया. महज एक सप्ताह में ग्रामीण करीब एक किलोमीटर सड़क तैयार कर चुके हैं और अब आगे का मार्ग बनाने के लिए फिर से चंदा जुटाने की तैयारी कर रहे हैं.
झोली में लिटाकर मरीज को ले जाना पड़ा अस्पताल
करीब 30 से 35 परिवारों और 250 से अधिक आबादी वाले इस फलिया की मुख्य सड़क से कनेक्टिविटी वर्षों से नहीं हो पाई है. ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेताओं और अधिकारियों द्वारा किए गए आश्वासन केवल वादे बनकर रह गए. ग्रामीणों ने हाल ही में 14 वर्षीय सखाराम की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि बीमारी के दौरान उसे झोली में लिटाकर एक स्थानीय चिकित्सक के पास ले जाना पड़ा था, क्योंकि गांव तक कोई सड़क नहीं थी.
अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
गांव के युवक मोहन बताते हैं कि वर्षों से उनकी सबसे कठिन जिम्मेदारी खेत या बाजार जाना नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को झोली में उठाकर पहाड़ियों के रास्ते मुख्य सड़क तक पहुंचाना रही है. अब वही युवक गांव की सड़क बनाने में जुटे हुए हैं. मोहन ने कहा, “गर्भवती महिलाओं और मरीजों को झोली में ले जाना पड़ता था. हमने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब तक लगभग एक किलोमीटर सड़क बना चुके हैं, लेकिन हमारी राशि खत्म हो गई है. जल्द ही फिर से धन जुटाकर एक और किलोमीटर सड़क का निर्माण करेंगे.”
अभियान में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं
इस अभियान में महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. ग्रामीण महिला रूमती बाई ने बताया, “घर का काम और खाना बनाने के बाद हम भी सड़क निर्माण में हाथ बंटाते हैं. यहां पीने का पानी, खाद, बीज और कृषि उपकरण तक सिर पर ढोकर लाने पड़ते हैं. खराब रास्ते के कारण लोग थककर बीमार पड़ जाते हैं.”