प्रेग्नेंसी के आधार पर IPS अधिकारी की ट्रेनिंग क्यों रुके? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट(File Photo)
supreme Court: गर्भावस्था के कारण महिला आईपीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग रोकने से जुड़े पुराने नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं. अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि कोई महिला अधिकारी मेडिकल जांच में पूरी तरह फिट पाई जाती है, तो सिर्फ गर्भवती होने की वजह से उसे प्रशिक्षण से बाहर रखने का औचित्य क्या है? इस मामले में कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है और सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी.
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए नियम उनके अधिकारों में बाधा नहीं बनने चाहिए.
अदालत ने यह भी कहा कि सभी महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति एक जैसी नहीं होती, इसलिए हर मामले में एक ही नियम लागू करना उचित नहीं माना जा सकता है. यदि कोई अधिकारी चिकित्सकीय रूप से प्रशिक्षण लेने में सक्षम है, तो उसे अवसर देने पर विचार किया जाना चाहिए.
सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि यदि एक अधिकारी को इस नियम में छूट दी जाती है, तो भविष्य में अन्य अधिकारी भी इसी तरह की राहत मांग सकते हैं. वहीं याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पहले भी कुछ मामलों में महिला अधिकारियों को विशेष परिस्थितियों में राहत दी जा चुकी है. अदालत ने यह भी पूछा कि क्या मध्य प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी उर्वशी सेंगर को जून 2026 से शुरू हुए प्रशिक्षण बैच में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है.
कब का है पूरा विवाद?
यह विवाद 1993 में गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक कार्यालय ज्ञापन (OM) से जुड़ा है. इस नियम के अनुसार यदि कोई महिला आईपीएस प्रोबेशनर प्रशिक्षण के दौरान गर्भवती हो जाती है, तो उसकी ट्रेनिंग रोक दी जाती है और उसे प्रसव के एक वर्ष बाद अगले बैच के साथ दोबारा प्रशिक्षण पूरा करना होता है.
मध्य प्रदेश कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी उर्वशी सेंगर ने इसी नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने फेज-2 प्रशिक्षण के दौरान गर्भवती होने की जानकारी अकादमी को दी थी. बच्चे के जन्म के बाद मेडिकल फिटनेस प्रमाणित होने पर उन्होंने दोबारा प्रशिक्षण में शामिल होने की अनुमति मांगी, लेकिन 1993 के नियम का हवाला देकर उनकी मांग अस्वीकार कर दी गई.
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है मामला
इसके बाद उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें अंतरिम राहत मिली थी. हालांकि बाद में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी की चुनौती पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी. अब सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है.