छात्र आंदोलन को मिला अन्ना हजारे का समर्थन, प्रदर्शन-सोनम वांगचुक और पेपर लीक पर क्या-क्या बोले?
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे
Anna Hazare Student Protest:देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. अब इस प्रदर्शन को सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अपना समर्थन दिया है. इसको लेकर उन्होंने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा है. उनके सहयोगियों के अनुसार, वे जल्द ही अहिल्यानगर पहुंचेंगे. प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा करेंगे.
मीडिया से बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के प्रमुख नेताओं में हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि किसी भी विवाद का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि बातचीत से निकलता है. इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है.
अन्ना हजारे ने क्या कहा?
छात्रों के सांसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना ने कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में कई आंदोलन किए, लेकिन हमेशा अहिंसा का रास्ता अपनाया है. उनका मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन में हिंसा या बल प्रयोग की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ, वह उचित नहीं था. उन्होंने दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की मांग की, हालांकि सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधे टिप्पणी करने से उन्होंने परहेज किया.
चूक हुई तो उसे स्वीकारना चाहिए-हजारे
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अन्ना ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और सरकार जनता की सेवक है. यदि किसी स्तर पर गंभीर चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. उनके अनुसार, जिम्मेदारी स्वीकार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है.
वांगचुक पर क्या बोले अन्ना?
अन्ना ने यह भी चिंता जताई कि लगातार दूसरे साल बड़ी संख्या में छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं और निराशा के चलते कई छात्रों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया, जो बेहद दुखद है. उनका कहना था कि पिछले 25 दिनों से छात्र और अभिभावक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, इसलिए इस पूरे मामले को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानकर देखना उचित नहीं है.
अन्ना हजारे ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलनकारी के साथ संवाद के बजाय जबरन कार्रवाई करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है.
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