Morena: आजादी के 78 साल बाद भी नहीं बना श्मशान घाट, 80 वर्षीय महिला के अंतिम संस्कार के लिए 1 किलोमीटर चले लोग

Morena News: गांव में श्मशान घाट नहीं होने के कारण एक बार फिर ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. 80 वर्षीय महिला के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों और ग्रामीणों को शव करीब 1 किलोमीटर तक कंधों पर ले जाना पड़ा.
People facing difficulties due to the lack of a cremation ground.

श्‍मशान नहीं होने से लोग परेशान

रिपोर्ट – मनोज शर्मा

Morena News: आजादी के 78 वर्ष पूरे होने के बावजूद मुरैना जिले के कैलारस जनपद अंतर्गत बघरोली ग्राम पंचायत में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है. गांव में श्मशान घाट नहीं होने के कारण एक बार फिर ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. 80 वर्षीय महिला के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों और ग्रामीणों को शव करीब 1 किलोमीटर तक कंधों पर ले जाना पड़ा.

1 किलोमीटर दूर करना पड़ा अंतिम संस्कार

जानकारी के अनुसार, गांव की 80 वर्षीय कंबोदा पत्नी श्रीपत राठौर का निधन हो गया. अंतिम संस्कार के लिए परिजनों और ग्रामीणों को उनका शव करीब 1 किलोमीटर दूर सुख नदी तक कंधों पर ले जाना पड़ा, क्योंकि गांव में आज तक श्मशान घाट का निर्माण नहीं हो सका है.

वर्षों से उठ रही है श्मशान घाट की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट के निर्माण की मांग कई वर्षों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने उठाई जाती रही है. कई बार आवेदन देने और मांग करने के बावजूद अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. इसका परिणाम यह है कि गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए दूर जाना पड़ता है.

बरसात में और बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. सुख नदी तक पहुंचने का रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है, जिससे शव ले जाने और अंतिम संस्कार करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया भी प्रभावित होती है.

प्रशासन से जल्द निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बघरोली ग्राम पंचायत में जल्द से जल्द श्मशान घाट का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने परिजन के अंतिम संस्कार के समय इस तरह की कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.

विकास के दावों पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी यदि गांव में श्मशान जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो यह विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है. अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेगा.

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