ब्राह्मणों के सहारे यूपी की सत्ता में वापसी की तैयारी! नई रणनीति से सपा कितना बदल पाएगी सियासी समीकरण?

Samajwadi Party UP Election Chemistry: उत्तर प्रदेश में भले ही ब्राह्मणों की आबादी सिर्फ 10 से 12 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन उनका दबदबा कई जिलों में है. यही वजह है सपा ब्राह्मणों को साधने के प्रयास में है.
Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव (File photo)

Samajwadi Brahmin Political Equation: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को भले ही अभी काफी समय बचा है, लेकिन सभी दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है. समाजवादी पार्टी (SP) ने विधानसभा चुनाव को लेकर नया दांव खेला है. SP ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए लखनऊ में प्रबुद्ध सम्मेलन करने जा रही है. अब देखना यह होगा कि जो ब्राह्मण करीब 14 सालों से यूपी में भारतीय जनता पार्टी के कोर वोटर माने जाते हैं. उन्हें अखिलेश यादव अपने पाले पर कैसे ला पाते हैं?

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सियासी एजेंडा अभी से सेट किए जाने लगे हैं. सूबे की सियासी बाजी जीतने और सत्ता पर काबिज होने के लिए सपा ने हर तानेबाने को बुनाना शुरू कर दिया है. ब्राह्मण समुदाय, जो सपा से नाराज चल रहा. उसे मनाने के लिए सपा ने लखनऊ में एक आयोजन किया है. दरअसल, सपा के संस्थापक सदस्य रहे जनेश्वर मिश्रा की जयंती है. इसी बहाने अखिलेश यादव ने लखनऊ में ब्राह्मण सम्मेलन रखा है. यानी जनेश्वर मिश्रा के बहाने सपा ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पैठ जमाना चाहती है. लेकिन क्या ब्राह्मण समाज के सपा में शामिल होने से यूपी का चुनावी गेम बदल जाएगा? सपा को ब्राह्मण वोटों की जरूरत क्या पड़ गई. अभी भी ये दोनों सवाल बने हुए हैं.

20 हजार ब्राह्मणों के शामिल होने का दावा

उत्तर प्रदेश में भले ही ब्राह्मणों की आबादी सिर्फ 10 से 12 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन उनका दबदबा कई जिलों में है. करीब 80 से ज्यादा ऐसी विधानसभा सीटें हैं. जहां पर ब्राह्मण समाज ही हार-जीत तय करता है. इसलिए सपा प्रबुद्ध सम्मेलन के जरिए ब्राह्मण समाज को साधने की तैयारी कर रही है. इस आयोजन ने पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड के ब्राह्मण समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया है. करीब 20 हजार से ब्राह्मणों के शामिल होने की संभावना है.

यूपी में हमेशा से ब्राह्मणों का दबदबा

यूपी की सियासत में अक्सर देखा गया है कि जिधर ब्राह्मण समाज वोट करता है. सरकार भी उसी की बनती है. 90 के दशक तक ब्राह्मण समाज कांग्रेस के साथ रहा तो यूपी में कांग्रेस की सरकार रही. इसके बाद कांग्रेस का दामन छोड़ साल 2007 में मायावती के साथ शामिल हो गए, तो यूपी में मायावती की सरकार बनी. इसके बाद समय-समय पर ब्राह्मण सभी दलों में अपनी पैठ बनाते रहे, लेकिन साल 2024 के बाद से पूरी तरह भाजपा के साथ शामिल हो गए. वर्तमान में यूपी में भाजपा की ही सरकार है.

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ब्राह्मणों को साधने की तैयारी में सपा

ऐसे में ब्राह्मण समाज को यूपी की सियासत से कभी इग्नोर नहीं किया जा सकता है. क्योंकि उनकी आबादी भले ही कम हो, लेकिन उनका प्रभाव पर्याप्त है. शायद यही वजह है अखिलेश यादव ब्राह्मणों को साधने के लिए पूरी कमर कसकर तैयारी बनाने में जुटे हैं. कल यानी बुधवार को राजधानी लखनऊ में सपा ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ के जरिए ब्राह्मण समाज को साधने की तैयारी कर रही है.

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