NALSAR में CJI सूर्यकांत को बुलाने पर भड़के छात्र, बोले- उनके हाथों डिग्री नहीं लेंगे

Hyderabad University: यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में कुछ मामलों की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत का रवैया उन्हें ठीक नहीं लगा. क्योंकि उन्होंने कुछ मामलों में छात्रों और युवाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता नहीं दिखाई.
CJI Suryakant NALSAR convocation controversy

सीजेआई सूर्यकांत

NALSAR convocation controversy: हैदराबाद की नालसार लॉ यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि को लेकर विवाद शुरू हो गया है. 2026 बैच के कुछ छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को समारोह में बुलाए जाने पर आपत्ति जताई है. युवाओं ने यह आपत्ति युवाओं के लिए ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर जताई है.

यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में कुछ मामलों की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत का रवैया उन्हें ठीक नहीं लगा. क्योंकि उन्होंने कुछ मामलों में छात्रों और युवाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता नहीं दिखाई. छात्रों का मानना है कि यह उस सोच से मेल नहीं खाता, जो उन्हें कानून की पढ़ाई के दौरान सिखाई जाती है. इसी मुद्दे को लेकर छात्रों ने यूनिवर्सिटी के कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को एक पत्र लिखकर प्रशासन से अपील की है कि मुख्य अतिथि को लेकर अंतिम फैसला लेने से पहले छात्रों की आपत्ति पर विचार किया जाए.

‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों के बाद छात्रों में नाराजगी

छात्रों ने इस दौरान जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी जिक्र किया है. छात्रों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान जब छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. लेकिन सुनवाई के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो सबूत को लेकर CJI ने वीडियो को यह कहते हुए देखने से इनकार कर दिया कि उनके पास समय नहीं है. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि सुनवाई के दौरान युवाओं के लिए ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया और याचिकाकर्ता के वकील को अपनी बात पूरी करने का मौका नहीं दिया गया.

अभी आधिकारिक घोषणा नहीं

छात्रों का कहना है कि उनका विरोध CJI के पद या सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ नहीं है. वे केवल CJI के कथित व्यवहार और कुछ टिप्पणियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि वे ऐसे व्यक्ति के हाथों डिग्री नहीं लेना चाहते, जिनके व्यवहार को वे अपने संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ मानते हैं. फिलहाल, दीक्षांत समारोह की तारीख और मुख्य अतिथि के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. छात्र चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी कोई अंतिम फैसला लेने से पहले उनकी बात सुने.

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