Narmadapur Panchayat: मैनपाट की नर्मदापुर पंचायत में 2.07 करोड़ का घोटाला, सरपंच-सचिवों को अंतिम नोटिस जारी

Narmadapur Panchayat Case: सरगुजा के मैनपाट जनपद की नर्मदापुर पंचायत में 2 करोड़ 7 लाख 16 हजार रुपये के आहरण में अनियमितता मिली. कलेक्टर के निर्देश पर जांच में सरपंच, सचिवों और वेंडरों को दोषी पाया गया. प्रशासन ने 3 दिन में जवाब मांगा है.
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अंबिकापुर। जनपद पंचायत मैनपाट की ग्राम पंचायत नर्मदापुर में विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों की राशि के आहरण में गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है. शिकायतों की जांच के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है. जांच में पंचायत के सरपंचों, सचिवों और विभिन्न वेंडरों द्वारा करीब दो करोड़ सात लाख 16 हजार रुपये की राशि के आहरण में अनियमितता बरते जाने की पुष्टि हुई है.

सरपंच-सचिवों को अंतिम नोटिस

मामले में संबंधितों को अंतिम नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है. अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के प्रविधानों के तहत राशि की वसूली के साथ सरपंच और सचिवों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

चार सदस्यीय जांच दल गठित

प्राप्त शिकायतों के आधार पर कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सीतापुर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल गठित किया था. जांच दल ने ग्राम पंचायत नर्मदापुर में मूलभूत सुविधाओं, 15वें वित्त योजना, स्वच्छ भारत मिशन सहित अन्य निर्माण कार्यों से संबंधित अभिलेखों और राशि के आहरण की बारीकी से जांच की.

जांच में क्या सामने आया

जांच में सामने आया कि पंचायत में विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि का आहरण पर्याप्त प्रमाणकों, मूल्यांकन, सत्यापन और नस्ती फाइल के अभाव में किया गया. कई मामलों में कार्यस्थल पर निर्माण कार्य कराए बिना ही राशि आहरित की गई और कुछ जगहों पर ग्राम सभा के अनुमोदन के बिना ही खर्च कर दिया गया.

जांच रिपोर्ट के अनुसार सचिव सिकंदर प्रजापति के कार्यकाल में 60 लाख 64 हजार रुपये, सचिव चंद्रपाल सिंह के कार्यकाल में आठ लाख 13 हजार रुपये तथा सचिव अनिल यादव के कार्यकाल में पांच लाख 11 हजार रुपये की राशि के आहरण में अनियमितता पाई गई.

इसी प्रकार सरपंच गणेश नाग के नाम पांच लाख 11 हजार, सरपंच राजनाथ भैंसा के नाम 60 लाख 66 हजार और सरपंच ललिता भैंसा के नाम सात लाख 89 हजार रुपये की राशि के आहरण का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा विभिन्न वेंडरों एवं फर्मों को भी 40 लाख 78 हजार रुपये का भुगतान किया गया. इनमें धनंजय सिंह, यादव इलेक्ट्रिकल्स, मां बंजारी ट्रांसपोर्ट, प्रकाश कुमार अंबष्ट और जय पहाड़ी माता फ्लाइ ऐश ब्रिक्स जैसी फर्में शामिल हैं.

जांच में यह भी पाया गया कि इन भुगतानों के एवज में संबंधित निर्माण कार्य मौके पर नहीं कराए गए थे. वित्तीय वर्षों के हिसाब से देखें तो वर्ष 2016-17 और 2017-18 में 10 लाख 22 हजार रुपये, वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच एक करोड़ 76 लाख 28 हजार 823 रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20 लाख 65 हजार 218 रुपये का आहरण अनियमितता के दायरे में पाया गया.

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