CG News: आर्थिक संकट से जूझ रहा अंबिकापुर नगर निगम, 4 महीने से नहीं मिला कर्मचारियों को वेतन, अवैध‍ कब्जों पर होगी कार्रवाई

CG News: अंबिकापुर नगर निगम इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. स्थिति यह है कि नगर निगम अपने कर्मचारियों को पिछले चार महीने से वेतन तक नहीं दे सका है.
Ambikapur Municipal Corporation

नगर निगम अंबिकापुर

CG News: अंबिकापुर नगर निगम इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. स्थिति यह है कि नगर निगम अपने कर्मचारियों को पिछले चार महीने से वेतन तक नहीं दे सका है. आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अब निगम ने अपनी संपत्तियों और दुकानों का सर्वे शुरू कर दिया है. इसी दौरान शहर के पुराने और नए बस स्टैंड समेत कई इलाकों में नगर निगम की ऐसी दुकानें सामने आई हैं, जिन पर कथित तौर पर वर्षों से लोगों का अवैध कब्जा है और निगम को किराए के रूप में एक भी रुपया नहीं मिल रहा है.

नियमों के विपरीत आवंटन की भी सामने आ रही जानकारी

नगर निगम के जिम्मेदारों के मुताबिक, शहर में निगम की संपत्तियों की जानकारी जुटाने के दौरान कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां दुकानों का आवंटन नियमों के विपरीत किए जाने की बात सामने आई है. कई दुकानों में वर्षों से व्यापारी कारोबार कर रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा नगर निगम को किराया नहीं दिए जाने की जानकारी सामने आई है. नगर निगम क्षेत्र के पुराने बस स्टैंड और नए बस स्टैंड में निगम की कई दुकानें हैं.

निगम के जनप्रतिनिधियों का दावा है कि इनमें से कुछ दुकानों पर लंबे समय से अवैध कब्जा है और बिना वैध प्रक्रिया के व्यापारी इन दुकानों का उपयोग कर रहे हैं. निगम अब ऐसी दुकानों की सूची तैयार कर रहा है. इसके बाद नियमों की जांच कर अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.

महापौर ने पिछली कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

अंबिकापुर महापौर मंजूषा भगत का आरोप है कि पूर्व में नगर निगम में कांग्रेस की सत्ता के दौरान दुकानों के आवंटन में अनियमितताएं की गईं. उनका कहना है कि इसी वजह से कई दुकानों से पिछले कई वर्षों से निगम को किराया नहीं मिल पा रहा है और इसका सीधा असर नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है. महापौर के मुताबिक, निगम की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए अब ऐसी संपत्तियों को चिन्हित किया जा रहा है, जिनसे निगम को राजस्व मिलना चाहिए, लेकिन लंबे समय से निगम को कोई आय नहीं हो रही है.

आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए संपत्तियों का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड

नगर निगम सभापति हरवींदर सिंह ने बताया कि निगम की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए शहरभर में नगर निगम की संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है. इसी प्रक्रिया में कई ऐसी दुकानें सामने आई हैं, जिन्हें कथित तौर पर नियमविरुद्ध तरीके से लोगों को दिए जाने और लंबे समय से किराया नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है. सभापति ने कहा कि निगम की संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है. इसके बाद नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.

अधिकारियों और इंजीनियरों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी

सभापति ने नगर निगम के अधिकारियों और इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि महापौर और मेयर इन काउंसिल के सदस्य शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर निगम की संपत्तियों की स्थिति का जायजा ले रहे हैं, लेकिन इस दौरान कई बार निगम के अधिकारी और इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं रहते.

इसको लेकर महापौर और सभापति ने नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि जब नगर निगम आर्थिक संकट से गुजर रहा है और राजस्व बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कवायद चल रही है, ऐसे समय में अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है.

अब अवैध दुकानों से राजस्व वसूली की तैयारी

नगर निगम की आर्थिक बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कर्मचारियों को लगातार चार महीने से वेतन नहीं मिल पाया है. ऐसे में निगम अब अपनी संपत्तियों से होने वाली आय बढ़ाने पर जोर दे रहा है.

निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन दुकानों को लेकर है, जहां कथित तौर पर वर्षों से लोग कब्जा कर कारोबार कर रहे हैं, लेकिन निगम को किराया नहीं मिल रहा. यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो आने वाले दिनों में ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ बकाया किराए की वसूली भी की जा सकती है.

वर्षों से अवैध कब्जे की स्थिति कैसे बनी रही

अब सवाल यह है कि नगर निगम की संपत्तियों पर आखिर इतने वर्षों तक अवैध कब्जे और किराया नहीं देने की स्थिति कैसे बनी रही? यदि नियमों के विपरीत दुकानें आवंटित की गईं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? और यदि निगम के अधिकारियों को इन दुकानों की जानकारी थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

फिलहाल निगम द्वारा संपत्तियों का सर्वे और संदिग्ध दुकानों की सूची तैयार करने का काम जारी है. आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है.

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