भोपाल की हवा पर NGT सख्त, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगा 2019 से अब तक का रिकाॅर्ड, सितंबर में होगी अगली सुनवाई

Bhopal News: भोपाल में वायु प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है.
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Bhopal News: भोपाल में वायु प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है. एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भोपाल नगर निगम से वर्ष 2019 से अब तक की वायु गुणवत्ता का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है. मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी.

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और न्यायिक सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ के समक्ष हुई. याचिका पर्यावरणविद् राशिद खान ने दायर की है, जिनकी ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पैरवी की.

नगर निगम की रिपोर्ट पर सवाल

20 मई 2026 के पूर्व आदेश के पालन में भोपाल नगर निगम ने एनजीटी के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट पेश की. निगम ने बताया कि उसे आवंटित और प्राप्त निधि का पर्याप्त इस्तेमाल किया गया है. हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों की समीक्षा के बाद अधिकरण ने इस दावे पर सवाल उठाए.

एनजीटी के मुताबिक वर्ष 2024-25 में करीब 12.44 करोड़ रुपए, यानी कुल निधि का केवल 21.18 प्रतिशत ही खर्च किया गया. वहीं, वर्ष 2025-26 में निधि के इस्तेमाल से संबंधित कोई स्पष्ट जानकारी रिपोर्ट में नहीं दी गई. वर्ष 2023-24 में भी किए गए कार्यों का पर्याप्त विवरण नहीं मिला.

आवेदक पक्ष ने उठाईं आपत्तियां

सुनवाई के दौरान आवेदक पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता और हर्षवर्धन तिवारी ने नगर निगम की अनुपालन रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों और दावों पर कई आपत्तियां दर्ज कराईं. अधिकरण ने इन आपत्तियों को लिखित रूप में दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है.

माहवार रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

एनजीटी ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वर्ष 2019 से वर्तमान तक भोपाल की वायु गुणवत्ता का विस्तृत स्टेटस चार्ट पेश करने का निर्देश दिया है. इसमें हर महीने की वायु गुणवत्ता का अलग-अलग विवरण देना होगा. इसके साथ ही प्रदूषण मापने वाले विभिन्न मानकों और पैरामीटर के आंकड़े भी अलग-अलग प्रस्तुत करने होंगे.

अधिकरण ने अनुमेय वायु गुणवत्ता मानकों का भी अलग चार्ट देने को कहा है, ताकि निर्धारित सीमा और वास्तविक स्थिति की तुलना की जा सके. मामले की अगली सुनवाई सितंबर में प्रस्तावित है.

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