हीरा भंडार वाले बक्सवाहा में सिस्टम बेबस! गर्भवती के लिए खाट बनी एंबुलेंस, सड़क का सपना आज भी अधूरा

Chhatarpur News: छतरपुर जिले के बक्सवाहा में एक बार फ‍िर स‍िस्‍टम की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है. जिसमें एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने के लिए खाट पर लेटकर जाना पड़ा. क्योंकि गांव में एंबुलेंस ही नहीं आ सकी.
कीचड़ में खाट का ही सहारा!

कीचड़ में खाट का ही सहारा!

Chhatarpur News: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का बक्सवाहा विकासखंड वैसे तो अपने हीरा भंडार के लिए देश-दुनिया में पहचान रखता है. लेकिन, ज्यादातर समय यह इलाका सिस्टर की लापरवाही या फ‍िर बुनियादी सुविधाओं की किल्लत से जूझता नजर आता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां कभी एंबुलेंस न मिलने से मरीज की मौत हो जाती है, तो कभी प्रेग्नेंट महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट का सहारा लेना पड़ता है. कई गांवों में लोगों के लिए आज भी सड़क एक सपने जैसी ही है.

बक्सवाहा विकासखंड से सामने आई एक तस्वीर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर रही है. बारिश के बाद सड़क कीचड़ में बदल गई. इसी दौरान गर्भवती मह‍िला को प्रसव पीड़ा हुई तो अस्‍पताल पहुंचने का कोई सहारा नहीं था. जब कोई रास्‍ता समझ नहीं आया तो ग्रामीणों ने खाट के सहारे मह‍िला को अस्‍पताल पहुंचाया.

ग्रामीणों ने करीब दो किलोमीटर तक ग्रामीण महिला को खाट पर लेकर पैदल चले और मुख्य मार्ग तक पहुंचाया. इसके बाद निजी वाहन की मदद से महिला को अस्पताल ले जाया गया. यहां भी मह‍िला को एंबुलेंस नसीब नहीं हुई.

कहां का है पूरा मामला?

पूरा मामला ग्राम पंचायत निमानी के मझरा टोला पडसिला का बताया जा रहा है. यहां रविवार को 23 साल तुलसा भिलाला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने बिना देर किए जननी एक्सप्रेस को सूचना दी. अपनी बात बताई और महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए मदद मांगी. परिजनों ने बताया कि वह करीब 3 घंटे तक इंतजार करते रहे. इसके बाद भी कोई वाहन गांव तक नहीं आ सका.

व‍िधायक और कलेक्‍टर भी नहीं कर पाए मदद

महिला की हालत को देखते हुए परिजनों ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मदद की गुहार लगाई. कलेक्टर और स्थानीय विधायक रामसिया भारती से संपर्क कर महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराने की मांग की गई. मदद का आश्वासन मिलने के बावजूद तत्काल गांव तक वाहन नहीं पहुंच पाया.

आखिरकार ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाया. कीचड़ से भरे रास्ते पर पैदल निकल पड़े. करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद वे मुख्य मार्ग तक पहुंचे. वहां से निजी वाहन की व्यवस्था कर महिला को अस्पताल पहुंचाया गया. तब जाकर मह‍िला को इलाज मिल सका.

सरकारी स‍िस्‍टम पर उठे सवाल

सरकारी योजनाओं के तहत गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए जननी एक्सप्रेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अगर खराब सड़क के कारण आपात स्थिति में वाहन गांव तक ही नहीं पहुंच पाए तो इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंद तक कैसे पहुंचेगा? ऐसा पहली बार नहीं है जब ग्रामीणों को इस तरह परेशान होना पड़ा है. कभी उनको अस्‍पताल में इलाज नहीं मिलता तो कभी इलाज के बदले सरकारी कर्मचारी ही पैसों की मांग करते हैं.

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