SIR पर घमासान के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, Form-6 से हटाई गई अतिरिक्त घोषणा
भारत निर्वाचन आयोग
Election Commission Voter Form Change: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विरोध जारी है. इन सब के बीच चुनाव आयोग ने Form-6 में बड़ा बदलाव किया है. जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए मतदाताओं के लिए ऑनलाइन Form-6 में जोड़ा गया अतिरिक्त SIR घोषणा वाला हिस्सा अब हटा दिया गया है. यह बदलाव 30 सितंबर को ECINET पोर्टल पर किया गया.
चुनाव आयोग के इस फैसले का सीधा और साफ मतलब है कि अब नए वोटर कार्ड बनवाने के लिए लोगों को अपने पूर्वजों से संबंधित दस्तावेज या जानकारी नहीं देनी होगी. यह अब नए वोटरों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. इसको लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी घमासान देखने को मिल रहा है. तमाम विपक्षी दल भी चुनाव आयोग के इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहे थे.
इस फैसले पर क्यों हो रही इतनी चर्चा
चुनाव आयोग के इस फैसले की टाइमिंग को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. इसके पीछे की भी कई वजहें हैं. Form-6 में SIR से जुड़े अतिरिक्त प्रावधान को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही आपत्तियां सामने आने की रिपोर्ट आई थी. इसी को लेकर देशभर में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन देखने को मिले थे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव की वैधता को लेकर सवाल उठाए थे. बाद में आयोग ने SIR पूरा हो चुके राज्यों के लिए पुराने प्रारूप पर लौटने का फैसला किया.
विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग पर बोला था हमला
Form-6 और ECINET को लेकर विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग की थी. कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ECINET की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे. आयोग ने आरोप लगाया था कि केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर व्यवस्था से स्थानीय चुनाव अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हो सकती है. पात्र मतदाताओं के नाम छूटने का खतरा पैदा हो सकता है.
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