अंबेडकर अस्पताल में हुई जटिल सर्जरीः  तीनों कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज के साथ गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस का हुआ ऑपरेशन

रायपुर. पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग ने एक बार फिर अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण कार्डियक सर्जरी में सफलता हासिल की है.
raipur dr ambedkar hospital state cancer institute expansion cost 39 crore rupees

राज्य कैंसर संस्थान का होगा विस्तार

रायपुर. पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग ने एक बार फिर अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण कार्डियक सर्जरी में सफलता हासिल की है. विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू एवं टीम ने 73 वर्षीय मरीज, जिसे घर पर अचानक बेहोश होने के बाद कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में अस्पताल लाया गया था, का सफलतापूर्वक कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) एवं एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट किया. उपचार के बाद मरीज की स्थिति अब स्थिर है और वह अस्पताल से डिस्चार्ज होने की स्थिति में है.

मरीज को गंभीर अवस्था में अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया था. उस समय उसकी हृदय गति रुक चुकी थी. आपातकालीन विभाग की टीम ने तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एवं डीसी शॉक (DC Shock) और डिफिब्रिलेशन (Defibrillation – चिकित्सा जगत में हृदय की असामान्य और जानलेवा धड़कनों Arrhythmias को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं ) देकर मरीज को पुनर्जीवित किया. हृदय की धड़कन वापस आने के बाद मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया.

हृदय की पंपिंग क्षमता केवल 15 प्रतिशत रह गई थी

कार्डियक अरेस्ट से सफलतापूर्वक रिवाइव होने के बाद भी मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी. जांच में उसकी हृदय की पंपिंग क्षमता (Ejection Fraction – EF) केवल लगभग 15 प्रतिशत पाई गई. इसके साथ ही मरीज की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज (Triple Vessel Disease) था तथा एओर्टिक वाल्व में गंभीर सिकुड़न (Severe Aortic Stenosis) पाई गई.

मरीज को कुछ दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट एवं गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया. स्थिति में सुधार होने पर वेंटिलेटर हटाया गया और इसके बाद उसे कार्डियक सर्जरी विभाग में स्थानांतरित किया गया. ऑपरेशन से पहले मरीज को लगभग 23 दिनों तक कार्डियक सर्जरी आईसीयू (ICU) में रखकर उसकी स्थिति को स्थिर करने का प्रयास किया गया.

इस दौरान मरीज को एक्यूट किडनी इंजरी (किडनी फेल्योर) की समस्या भी हुई और कुछ समय के लिए पेशाब का आना बंद हो गया था. स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए प्रारंभिक अवस्था में मरीज ऑपरेशन के लिए उपयुक्त नहीं था. धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने उसे ऑपरेशन के लिए तैयार किया.

परिजनों को समझाई गई थी ऑपरेशन की गंभीरता

मरीज की उम्र, हाल ही में हुए कार्डियक अरेस्ट, CPR के बाद बेहद कम हृदय की पंपिंग क्षमता (Ejection Fraction – EF), तीनों कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज तथा गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस को देखते हुए ऑपरेशन अत्यंत जोखिमपूर्ण था. मरीज के परिजनों को उसकी गंभीर स्थिति तथा ऑपरेशन से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. यहाँ तक की मरीज का ऑपरेशन थिएटर से निकल पाना मुश्किल है,इसके बावजूद परिजनों ने ऑपरेशन के लिए सहमति दी.

एक ही सर्जरी में  सीएबीजी (CABG) और एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट

सीटीवीएस विभागाध्यक्ष एवं मुख्य सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए उसका कोरोनरी धमनी बाईपास ग्राफ्टिंग (Coronary Artery Bypass Grafting (CABG)) किया गया. हृदय की बंद कोरोनरी धमनियों में वेन एवं आर्टरी कंड्यूट का उपयोग करते हुए बाईपास बनाया गया. इसके बाद गंभीर रूप से संकुचित एओर्टिक वाल्व को हटाकर टाइटेनियम से निर्मित बायलीफलेट मैकेनिकल एओर्टिक वाल्व (Bileaflet Mechanical Valve) प्रत्यारोपित किया गया.

उन्होंने बताया कि इस मरीज की सर्जरी कई कारणों से बेहद चुनौतीपूर्ण थी. मरीज की उम्र 73 वर्ष थी, हाल ही में कार्डियक अरेस्ट हो चुका था,सीपीआर (CPR) के बाद हृदय की पंपिंग क्षमता केवल 15-20 प्रतिशत के आसपास थी, तीनों कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज था और साथ ही गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस भी था. ऐसी स्थिति में एक साथ सीएबीजी (कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट) और महाधमनी वाल्व प्रतिस्थापन (Aortic Valve Replacement) करना अत्यंत जटिल प्रक्रिया होती है.

सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ. वर्तमान में मरीज चिकित्सकीय रूप से स्थिर है और अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी है. यह उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया.

डीन एवं अधीक्षक ने दी चिकित्सकीय टीम को बधाई

पी.टी.जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस जटिल सर्जरी की सफलता पर सीटीवीएस (CTVS) विभाग एवं पूरी टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि अम्बेडकर अस्पताल में गंभीर एवं जटिल हृदय रोगों के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, अत्याधुनिक सुविधाओं और बहुविषयक चिकित्सा टीम के माध्यम से मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है. समय-समय पर किए जाने वाले ऐसे जटिल एवं चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के कारण लोगों का विश्वास संस्थान के प्रति दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. 

ऑपरेशन में शामिल टीम

  • हार्ट सर्जन:- डॉ. कृष्णकांत साहू, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष
  • कार्डियक एनेस्थीसिया:- डॉ. संकल्प दीवान
  • पर्फ्युजनिस्ट:-अंकिता श्रीवास्तव, दिगेश्वर
  • पी.जी. स्टूडेंट:-डॉ. पल्लवी यादव
  • ओटी नर्सिंग स्टाफ:-राजेन्द्र साहू, नूतन, नरेंद्र, मुनेश, चोवा, दुष्यन्त, तेजश्री
  • एनेस्थीसिया टेक्नीशियन:-भूपेंद्र, हरीश, निराकार, सरिता, खेमसिंह, रोजलिन
  • आईसीयू नर्सिंग स्टाफ:-तेजेन्द्र, भावना, शिबा, जागृति एवं अन्य स्टाफ

ये खबर भी जरूर पढ़ेंः हरिराज होटल के बाथरूम में मिला स्पाइ कैमरा, आरोपी स्टाफ फरार…

ज़रूर पढ़ें