सपा के तीन बागी विधायकों ने थामा बीजेपी का दामन, राज्यसभा चुनाव में की थी अखिलेश से बगावत
इन तीन विधायकों ने थामा बीजेपी का दामन
SP Rebel MLAs Join BJP: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के 3 बागी विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. इनमें अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं. तीनों नेताओं के भाजपा में जाने से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है. हालांकि सपा पहले ही कह चुकी है कि इन लोगों को हम पहले ही बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं.
अमेठी के गौरीगंज में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने तीनों विधायकों को पार्टी की सदस्यता दिलाई. इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी समेत पार्टी के कई नेता मौजूद रहे. विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस घटनाक्रम को बीजेपी की चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ी थी सपा से दूरी
तीनों विधायकों की समाजवादी पार्टी से नाराजगी करीब दो साल पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान सामने आई थी. फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में सपा के कुछ विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग जाकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था. इसके बाद इन नेताओं और सपा नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ गई थी.
राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह का नाम भी इस बगावत से जुड़ा था. राकेश प्रताप सिंह को बाद में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, जबकि वह विधानसभा में विधायक बने रहे. तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने की चर्चा काफी समय से चल रही थी, जिस पर अब औपचारिक मुहर लग गई है.
भाजपा को अवध और बुंदेलखंड में मिलेगा फायदा?
राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज से, अभय सिंह गोसाईगंज से और विनोद चतुर्वेदी कालपी से विधायक हैं. तीनों अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में भाजपा को इनके राजनीतिक प्रभाव का लाभ मिलने की उम्मीद है. वहीं, समाजवादी पार्टी के लिए इन नेताओं का जाना अपने स्थानीय संगठन और चुनावी रणनीति के लिहाज से चुनौती बन सकता है.
2027 के चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं. ऐसे समय में सपा के तीन मौजूदा विधायकों का भाजपा में जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, इसका वास्तविक चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा. फिलहाल इस घटनाक्रम ने भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है.
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