शिक्षक भर्ती में 60% से ज्यादा आरक्षण वाला रोस्टर निरस्त, हाई कोर्ट ने कहा- SC के फैसले के अधीन रहेंगी नियुक्तियां

Bilaspur HighCourt News: बिलासपुर. छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती के आरक्षण रोस्टर को लेकर हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है.
cg highcourt

सीजी हाई कोर्ट

Bilaspur HighCourt News: बिलासपुर. छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती के आरक्षण रोस्टर को लेकर हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है. जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने 2023 की भर्ती के उस विज्ञापन को निरस्त कर दिया है, जिसमें 29 नवंबर 2012 की आरक्षण अधिसूचना और उसके आधार पर बनाए गए मॉडल रोस्टर को लागू किया गया था. हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह रद्द नहीं होगी और पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल हटाया भी नहीं जाएगा. हालांकि, सभी नियुक्तियां और आगे होने वाली पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी. (CG Teacher Recruitment Reservation Roster Quashed)

 राज्य शासन द्वारा 4 मई 2023 को सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के पदों पर भर्ती के लिए व्यापमं के माध्यम से विज्ञापन जारी किया गया था. इस भर्ती में सरगुजा और बस्तर संभाग समेत विभिन्न जिलों के लिए आरक्षण रोस्टर तैयार किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, कहा कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 19 सितंबर 2022 को ही 2012 के 58% आरक्षण के नोटिफिकेशन और मॉडल रोस्टर को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था. ऐसे में इसके आधार पर नया विज्ञापन जारी करना और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए तय सीमा से अधिक (60% से ज्यादा) पद आरक्षित करना गलत है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार ई-कैडर के 1113 पदों में से 698 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे. यह कुल पदों का करीब 62.71% था. इसी तरह टी-कैडर के 4659 पदों में से 3105 पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित थे, जो करीब 66.64% है. उनका तर्क था कि इससे अनारक्षित और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए उपलब्ध पदों की संख्या कम हो गई.

2012 की अधिसूचना को 2022 में किया गया था निरस्त

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राज्य में 29 नवंबर 2012 की अधिसूचना के जरिए आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाकर 58% किया गया था. इसमें अनुसूचित जाति के लिए 12%, अनुसूचित जनजाति के लिए 32% और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14% आरक्षण निर्धारित किया गया था. इस व्यवस्था को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 19 सितंबर 2022 को निरस्त कर दिया था. इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका पेश की थी. सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई 2023 को पहले से लंबित भर्ती और पदोन्नति प्रक्रियाओं को अंतिम निर्णय के अधीन पूरा करने की अनुमति दी थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस आदेश के आधार पर निरस्त आरक्षण व्यवस्था के तहत नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया जा सकता. (CG Teacher Recruitment Reservation Roster Quashed)

ये खबर भी जरूर पढ़ेंः Navratri 2026: मातृ-रूपेण संस्थिता… जब मांओं ने बचाई एक मां की जान

ज़रूर पढ़ें