Bhopal: एमपी में दो प्रतिशत कर्मचारी भी नहीं बन पाए कर्मयोगी, देशभर में तीसरे स्थान पर रैकिंग

मिशन कर्मयोगी आईगॉट पोर्टल पर कर्मचारियों की कम भागीदारी चिंता का विषय बन गई है. अब विभागाध्यक्षों और कमिश्नर-कलेक्टरों को प्रशिक्षण बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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मिशन कर्मयोगी, फाइल फोटो

भोपाल – मध्यप्रदेश में मिशन कर्मयोगी के तहत आईगॉट कर्मयोगी पोर्टल पर सरकारी कर्मचारियों की कम भागीदारी के कारण प्रदेश की रैंकिंग प्रभावित हो रही है. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने प्रशिक्षण गतिविधियों में तेजी लाने की तैयारी की है. सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों और संभागायुक्तों के साथ कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि शासकीय सेवकों की प्रशिक्षण में भागीदारी बढ़ाई जाए.

सरकार का जोर प्रत्येक कर्मचारी को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिलाने और पोर्टल पर सक्रियता बढ़ाने पर है. रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश के दो प्रतिशत कर्मचारी भी ट्रेनिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं यह चिंता की बात है और यही वजह है कि सामान्य प्रशासन विभाग में अब जिम्मेदारी कलेक्टर स्तर पर सौंपी हैं.

मिशन कर्मयोगी के तहत आईगॉट कर्मयोगी पोर्टल सरकारी कर्मचारियों के कौशल विकास, भूमिका आधारित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का माध्यम है. इसके जरिए कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यों में दक्ष बनाने के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं. सरकार का मानना है कि प्रशिक्षण से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा.

हर महीने एक घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य

विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को प्रत्येक महीने कम से कम एक घंटे का आईगॉट प्रशिक्षण पूरा करने के लिए प्रेरित करें. विभागीय अधिकारी और नोडल अधिकारी पोर्टल पर पंजीकृत कर्मचारियों की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे. जिन कर्मचारियों की प्रशिक्षण में भागीदारी कम है, उन्हें सक्रिय करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे.

सरकार का उद्देश्य प्रशिक्षण को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाना है. विभागों को विषय विशेषज्ञों का नामांकन करने और प्रशिक्षण की प्रगति पर नजर रखने के लिए भी कहा गया है.

दो प्रतिशत कर्मचारी भी नहीं ले रहे प्रशिक्षण

रिपोर्ट के अनुसार, आईगॉट पोर्टल पर पिछले महीने कई महीनों के मुकाबले प्रशिक्षण पूरा करने वाले कर्मचारियों का प्रतिशत काफी कम रहा. मई में 1.2 प्रतिशत, जून में 1.7 प्रतिशत और जुलाई में 1.14 प्रतिशत कर्मचारियों ने प्रशिक्षण लिया. अगस्त में यह आंकड़ा 1.13 प्रतिशत बताया गया है. कम भागीदारी को देखते हुए अधिकारियों को प्रशिक्षण गतिविधियों में सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं.

प्रदेश में तीन लाख से ज्यादा कर्मचारी निष्क्रिय

मध्यप्रदेश में पोर्टल पर कुल 9 लाख 7 हजार 538 शासकीय सेवक पंजीकृत हैं. इनमें 5 लाख 6 हजार से अधिक सक्रिय लोक सेवक बताए गए हैं, जबकि निष्क्रिय लोक सेवकों की संख्या 3 लाख 89 हजार 698 है. इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के निष्क्रिय रहने से प्रशिक्षण अभियान को गति देने की जरूरत महसूस की जा रही है.

रैंकिंग सुधारने की चुनौती – GAD

31 जुलाई 2026 की स्थिति में केंद्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की रैंकिंग तीसरे स्थान पर बताई गई है. इसके बावजूद प्रशिक्षण में कम भागीदारी चिंता का विषय बनी हुई है. अब सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक कर्मचारी पोर्टल पर नियमित प्रशिक्षण पूरा करें, जिससे उनकी दक्षता बढ़े और प्रदेश की रैंकिंग में भी सुधार हो सके.

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