ग्वालियर किले के आलमगीर गेट में लगती थी औरंगजेब की कचहरी, प्रजा की समस्या खुद सुनता था मुगल बादशाह
Alamgir Gate Gwalior: भारत साल 1947 में स्वतंत्र हुआ और इसके कुछ साल बाद ही अपनी न्यायिक व्यवस्था के लिए साल 1950 में यहां संविधान लागू हुआ. लेकिन 1950 से पहले भारत में कई शासकों ने राज कर अपनी हुकूमत चलाई और जनता पर अपनी हुकूमत चलाते रहे. सदियों पहले तैयार किए गए ग्वालियर के किले पर मुगलों ने भी अपना कब्ज़ा जमाया था. साल 1660 में ग्वालियर के इसी किले में 'किला गेट' का निर्माण कराया गया था, जहां बाद में औरंगज़ेब ने एक कचहरी बनवाई थी और यहीं बैठकर वह जनता से जुड़ी समस्याओं का हल करता था.
ग्वालियर रियासत पर 16वीं सदी में मुगल सम्राट औरंगजेब ने कब्जा कर अपना शासन चलाया था.
उसने किले के प्रवेश द्वार पर एक कचहरी बनवाई थी, जहां लोगों की समस्याएं सुनी जाती थीं.
यह कचहरी आज भी किला गेट के अंदर मौजूद है और पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित है.
इस गेट का निर्माण 1660 में कराया गया था, जिसे आलमगीर गेट भी कहा जाता है.
इतिहासकार बताते हैं कि औरंगजेब ने किले के पास मस्जिद बनवाई और आसपास का इलाका बसाया था.
इस कचहरी में कई कमरे बने हैं, जहां प्रजा से जुड़े कामकाज होते थे और खुद औरंगजेब बैठता था.
विद्वान हरिहर निवास द्विवेदी ने अपनी किताब 'ग्वालियर के तोमर' में भी इसका जिक्र किया है.
औरंगजेब के जिंदा रहने तक ही यह कचहरी लगी, उसके बाद यह खत्म हो गई.
उस दौर में ग्वालियर किला मुगलों के लिए जेल की तरह इस्तेमाल होता था, जहां शाही कैदियों को रखा जाता था.
औरंगजेब ने अपने भाई मुराद बख्श को भी मन मंदिर महल में कैद करके रखा था.