Bilaspur: रिश्वतखोरी के मामले में हेड कांस्टेबल को हाईकोर्ट से राहत, 14 साल पुरानी सजा हुई रद्द
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
Bilaspur: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रिश्वतखोरी के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए हेड कांस्टेबल जितेंद्र साहू को दोषमुक्त कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है. इसी आधार पर वर्ष 2012 में विशेष न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त कर दिया गया. यह फैसला न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने सुनाया है.
क्या था पूरा मामला?
ये पूरा मामला 2005 का है. शिकायतकर्ता माधव मंडल फरसगांव स्थित कीर्ति ऑटोमोबाइल नामक दुकान का संचालक था. आरोप था कि एक ग्राहक से विवाद के बाद उसके खिलाफ अत्याचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कराने की धमकी देकर तत्कालीन हेड कांस्टेबल जितेंद्र साहू ने 1000 रुपये रिश्वत की मांग की. शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो जगदलपुर ने ट्रैप की कार्रवाई की और आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने का दावा किया गया. इसके बाद विशेष न्यायालय ने वर्ष 2012 में जितेंद्र साहू को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 एवं 13 के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी.
हाईकोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की विस्तार से जांच के बाद कई गंभीर खामियां पाईं। जैसे शिकायतकर्ता माधव मंडल की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई, जिससे वह कोर्ट में बयान नहीं दे सका. रिश्वत की रकम आरोपी के पास से नहीं, बल्कि फर्श से बरामद की गई. किसी भी गवाह द्वारा रिश्वत की स्पष्ट मांग को प्रमाणित नहीं किया जा सका. ऑडियो रिकॉर्डिंग या वॉयस सैंपल जैसी कोई तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं की गई. गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए. कोर्ट ने माना कि केवल रकम की बरामदगी से अपराध सिद्ध नहीं होता, जब तक रिश्वत की मांग और स्वेच्छा से स्वीकार करना प्रमाणित न हो.
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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई अहम निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि, भ्रष्टाचार के मामलों में रिश्वत की मांग साबित होना अनिवार्य है. केवल रकम की बरामदगी पर्याप्त नहीं है. कोर्ट ने पी. सोमाराजू बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और राजेंद्र कुमार यादव बनाम राज्य मामलों का उल्लेख करते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को कानूनी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण बताया. इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि और सजा का आदेश रद्द कर दिया. हेड कांस्टेबल जितेंद्र साहू को सभी आरोपों से बरी कर दिया है.