CG Coal Scam: कोयला घोटाला मामले में सूर्यकांत के फरार ड्राइवर को हाई कोर्ट से नहीं मिली अग्रिम जमानत
कोयला घोटाला
CG Coal Scam: छत्तीसगढ़ में चर्चित कोयला घोटाला मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी नारायण साहू को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है. नारायण साहू, सूर्यकांत तिवारी का ड्राइवर है, जो अभी फरार चल रहा है.
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में जमानत पर विचार करते समय सामान्य अपराधों से अलग दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका हो और जो लंबे समय से फरार चल रहा हो, वह अग्रिम जमानत जैसी असाधारण राहत का हकदार नहीं हो सकता.
कौन है नारायण साहू?
- ACB-EOW में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, नारायण साहू कोयला घोटाले के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी का ड्राइवर था.
- उसका सबसे भरोसेमंद सहयोगी और सिंडिकेट का मुख्य कैश हैंडलर था.
- एसीबी की जांच में पता चला कि उसने कोयला सिंडिकेट की ओर से करीब 13 करोड़ रुपए की अवैध नगदी इकट्ठा की थी.
यह मामला एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर में दर्ज अपराध से संबंधित है, जिसमें आरोपी के खिलाफ धारा 420, 120-बी, 384 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 7ए और 12 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
कैसे हुआ कोयला घोटाला?
- दरअसल छत्तीसगढ़ में अवैध कोल लेवी वसूली का मामला ईडी की रेड में सामने आया था. छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाला को लेकर ED की माने तो छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का कोयला घोटाला हुआ है.
- यह घोटाला साल 2020 से 2022 तक किया गया है. जिसमें पता चला कि कोल परिवहन में कोल व्यापारियों से वसूली करने के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था.
- खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर बिश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया था. इसके लिए सिंडिकेट बनाकर वसूली की जाती थी.
- पूरे मामले का मास्टरमाइंड किंगपिन कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया. जो व्यापारी 25 रुपए प्रति टन के हिसाब से अवैध रकम सूर्यकांत के कर्मचारियों के पास जमा करता था. उसे ही खनिज विभाग पीट पास और परिवहन पास जारी करता था.
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- इस तरह से स्कैम कर कुल 570 करोड़ रुपए की वसूली की गई. जिसमें सौम्या चौरसिया और रानू साहू भी पूरी तरह से संलिप्त थी.
- प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक इसके खुलासे के लिए सैकड़ों जगह छापेमारी करने के बाद मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है.