सरकारी कर्मचारियों को बिना विभागीय जांच के बर्खास्त नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. HC ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को बिना विभागीय जांच के बर्खास्त नहीं किया जा सकता है.
CG High Court (File Photo)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

CG High Court: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा शासकीय कर्मचारियों की सेवा समाप्त किए जाने यानी बर्खास्तगी को लेकर अहम फैसला सुनाया गया है. हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को बिना विभागीय जांच के बर्खास्त नहीं किया जा सकता है. जानें क्या है पूरा मामला-

सेवा समाप्त किए जाने के आदेश पर रोक

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शासकीय कर्मचारियों की सेवा समाप्त किए जाने के आदेश पर रोक लगाते हुए अपने आदेश में कहा कि उक्त आदेश छत्तीसगढ़ सिविल सर्विस क्लासीफिकेशन कंट्रोल एंड अपील रूल्स 1966 के नियम 14 के उल्लंघन के आधार पर पारित किया गया है. इस आदेश में यह बंधनकारी व्यवस्था दी है कि किसी भी शासकीय सेवक को बिना विभागीय जांच के शासकीय सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता है. साथ ही वर्तमान केस में बिना विभागीय जांच के याचिकाकर्ता को शासकीय सेवक से बर्खास्त कर दिया गया है.

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ईश्वरी निर्मलकर और पांच अन्य याचिकाओं में याचिकाकर्ता के बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी है. ईश्वरी निर्मलकर की नियुक्ति साल 2007 में शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के पद पर जनपद पंचायत मगरलोड के द्वारा की गई थी. साल 2009 से उसकी नियुक्ति नियमित कर दी गई थी. वहीं, 2018 में याचिकाकर्ता का अबसॉर्पशन स्कूल शिक्षा विभाग में शासकीय सेवक के पद पर किया गया और उसकी पदोन्नति हेड मास्टर प्राइमरी स्कूल के पद पर साल 2023 में हुई.

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राज्य लोक आयोग में शिकायत पर केस दर्ज

साल 2007 में छत्तीसगढ़ राज्य लोक आयोग में शिकायत पर केस दर्ज हुआ और पुलिस द्वारा साल 2011 में FIR दर्ज की गई. अब साल 2025 में पूरक चालान में याचिकाकर्ता को अभियुक्त बनाया गया लेकिन कोर्ट में ट्रायल पेंडिंग है. फर्जी दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति प्राप्ति के आरोप के आधार पर आपराधिक केस दर्ज होने का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता को शो कॉज नोटिस जारी कर जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी ने 24 घंटे में जवाब मांगा. अब जवाब प्रस्तुत करते हुए याचिकाकर्ता ने आरोपों से इनकार किया परंतु इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी के द्वारा आदेश दिनांक 6 जनवरी 2026 द्वारा याचिकाकर्ता को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया, जिसे याचिकाकर्ता के द्वारा अपने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, अरिंदम मित्रा, श्रद्धा मिश्रा के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और न्यायमूर्ति पी पी साहू के द्वारा नोटिस जारी करते हुए, जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पारित बर्खास्तगी आदेश दिनांक 06.01.26 पर रोक लगा दी.

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