CG News: कई गांवों में ईसाई समुदाय के लोगों के प्रवेश पर रोक, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ईसाई समुदाय को गांवों में पोस्टर लगाकर प्रवेश से रोकने व पादरियों पर हमले और धार्मिक भेदभाव की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है.
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ईसाई समुदाय को गांवों में पोस्टर लगाकर प्रवेश से रोकने व पादरियों पर हमले और धार्मिक भेदभाव की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. बुधवार 17 सितंबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की और दो सप्ताह में विस्तृत जवाब-शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया.

गांवों में ईसाईयों के प्रवेश पर रोक, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

याचिकाकर्ता नरेंद्र भवानी की ओर से अधिवक्ता डा. अर्पित लाल ने बताया कि राज्य के कई गांवों में ईसाई समुदाय के लोगों को भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि ग्राम सभाएं पादरियों पर जबरन मतांतरण का आरोप लगाते हुए गांवों के प्रवेश द्वारों पर नोटिस बोर्ड लगा रही हैं. इन बोर्डों में लिखा है कि ईसाई पादरी और मतांतरित लोग गांव में प्रवेश न करें. न सिर्फ पादरियों बल्कि गांव के ही ईसाई निवासियों को अपने घरों तक जाने से भी रोका जा रहा है. याचिका में यह भी उल्लेख है कि जब पादरी या ईसाई समुदाय के लोग अपने रिश्तेदारों या मित्रों से मिलने गांव में जाते हैं, तो उन्हें स्थानीय लोग रोकते हैं, कई बार मारपीट कर भगा देते हैं और उनके घरों को तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाते हैं. याचिकाकर्ता ने इस गंभीर स्थिति को लेकर कांकेर जिले के कलेक्टर, एसडीएम भानुप्रतापपुर, तहसीलदार भानुप्रतापपुर और अंतागढ़ तहसीलदार को विस्तृत लिखित शिकायतें दी हैं, जिनमें घटना का ब्यौरा दिया गया है.

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13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब-हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता वाई.एस. ठाकुर ने नोटिस स्वीकार कर लिया. जिससे उन्हें अलग से नोटिस भेजने की आवश्यकता नहीं रही. शेष प्रतिवादियों को रजिस्टर्ड डाक और सामान्य डाक से नोटिस भेजने का निर्देश दिया गया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2025 को होगी, जिसमें राज्य सरकार और अन्य संबंधित अधिकारी अपने जवाब और कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत करेंगे.

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