पति-पत्नी के बीच के विवाद को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

CG High Court: आत्महत्या के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए एक पति की 4 साल की सजा को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच के विवाद को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता.
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

CG High Court: बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पत्नि द्वारा आत्महत्या करने के मामले में सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. इस मामले में हाई कोर्ट ने पति की 4 साल की सजा को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच के विवाद को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता. इस दौरान अभियोजन आत्महत्या व उकसावे के आवश्यक तत्व प्रमाणित करने में विफल रहा. वहीं, सुनवाई के दौरान आत्महत्या सिद्ध नहीं हो पाने पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 आईपीसी) के एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 4 साल की सजा को निरस्त कर दिया है. न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आत्महत्या के लिए उकसावे के आवश्यक तत्व साबित करने में असफल रहा है.

क्या था मामला?

यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा थाना क्षेत्र का है. आरोपी बसंत कुमार सतनामी के खिलाफ आरोप था कि उसकी पत्नी टिकैतिन बाई ने विवाह के करीब चार वर्ष बाद कथित प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली. ट्रायल कोर्ट (द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, एफटीसी जांजगीर) ने 31 जुलाई 2007 को आरोपी को धारा 306 आईपीसी के तहत दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी.

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