राकेश कुमार

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राकेश कुमार विस्तार न्यूज़ में वरिष्ठ उप संपादक सह संवाददाता के पद पर हैं. यहां वो डेटा स्टोरीज, एक्सप्लेनर के अलावा इन डेप्थ खबरों पर काम करते हैं. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल कर चुके राकेश को रिसर्च में इंटरेस्ट है. इन्हें राजनीति के अलावा बिजनेस, मनोरंजन और लीगल न्यूज स्टोरीज पर काम करना पसंद है. काम के इतर बात करें, तो राकेश को खाली वक्त में फिल्में, क्रिकेट खेलने और किताब पढ़ने में मजा आता है. पूर्व में राकेश सहारा समय नेशनल न्यूज़ चैनल, फीवर FM, APN न्यूज़ और भारत एक्सप्रेस जैसे संस्थानों से जुड़े थे.

Chabi Wale Baba

कुंभ नगरी में चर्चा का विषय बने ‘Chabi Wale Baba’, इस वजह से साथ रखते हैं 20 किलो की चाबी

बाबा का असली नाम हरिश्चंद्र विश्वकर्मा है, और वे उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से हैं. 50 वर्षीय हरिश्चंद्र बचपन से ही आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित थे, लेकिन परिवार के डर के कारण वे अपनी बातों को खुलकर नहीं कह पाते थे. 16 साल की उम्र में उन्होंने समाज में फैली बुराइयों और नफरत के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया और घर छोड़ दिया.

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मोटरसाइकिल खरीदने की थी ख्वाहिश, कलयुगी मां-बाप ने 9 दिन के बेटे को 60 हजार में बेच डाला!

पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) की एक संयुक्त टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की और शनिवार को बच्चे को बचा लिया. हालांकि, बच्चे को लेने वाले दंपति ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया.

IPS Kunal Kishore

1983 का ‘बॉबी कांड’…कैसे IPS Kunal Kishore की जांच से हिल गई थी बिहार सरकार? सियासी साजिश हुआ था बेनकाब!

कई उलझनों के बाद यह हाई प्रोफाइल केस अंततः बंद कर दिया गया. बिहार में इस केस को लेकर हलचल बनी रही, लेकिन न्याय का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं निकल सका. कुणाल किशोर ने अपनी किताब 'दमन तक्षकों का' में इस मामले की गहराई से जानकारी दी है.

Arvind Kejriwal, Virender Sachdeva

5000 नाम काटे, 7000 नए जोड़े…केजरीवाल ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप, सचदेवा ने किया पलटवार

केजरीवाल ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि बीजेपी वोटर लिस्ट में दखलअंदाजी कर रही है. उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने हाल ही में दो महीने तक घर-घर जाकर मतदाता पहचान पत्रों को अपडेट किया था, लेकिन अब केवल 15 दिनों में हजारों नए नाम किस प्रकार से जुड़े हैं?

PV Narasimha Rao, VP Singh, Morarji Desai

दिल्ली से बाहर क्यों हुए तीन प्रधानमंत्रियों के अंतिम संस्कार? ‘स्मारक’ के बहाने सवालों के घेरे में कांग्रेस!

भारत के 7वें प्रधानमंत्री वीपी सिंह का कार्यकाल 1989 से 1990 तक रहा. उनका निधन 2008 में हुआ था और जब उनकी मृत्यु हुई, तो उनके अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद उठा. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीपी सिंह के परिवार ने उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में करने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्हें इलाहाबाद ले जाकर संगम के किनारे उनका संस्कार किया गया.

South Korea Plane Crash

दक्षिण कोरिया में भीषण विमान हादसा, जेजू एयर का विमान रनवे से उतरकर फेंसिंग से टकराया, 179 की मौत

घटना उस समय घटी जब जेजू एयर का विमान मुआन हवाई अड्डे पर लैंडिंग करने की कोशिश कर रहा था. विमान में कुल 175 यात्री और 6 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से अधिकांश यात्री दक्षिण कोरिया के नागरिक थे.

Om Prakash Rajbhar

CM योगी के मंत्री राजभर ने ठेकेदार को दी गाली! जमकर वायरल हो रहा है वीडियो, बेटे अरूण ने कहा- डीपफेक का ‘खेल’

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विरोधियों ने इस पर जमकर आलोचना शुरू कर दी, लेकिन अब इस मामले में एक नया मोड़ आया है. ओम प्रकाश राजभर के बेटे और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता, अरुण राजभर ने दावा किया है कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है.

Manmohan Singh

अलविदा डॉ. मनमोहन सिंह…राष्ट्र निर्माण के ‘महानायक’ को श्रद्धांजलि

आज जब हम विदेशों में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का उपयोग करते हैं, मंहगे मॉल्स में शॉपिंग करते हैं, और नई तकनीकों का फायदा उठाते हैं, तो यह सब डॉ. मनमोहन सिंह की नीतियों का परिणाम है.

Manmohan Singh

मनमोहन सिंह के 5 जादुई फैसले, जिनसे बदल गई भारत की तस्वीर

डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए अतुलनीय रहेगा. उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी और उसे वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनका कार्यकाल भारतीय इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा,

Sambhal Ki Bawadi

बावड़ी, मंदिर और मूर्तियां…संभल के सीने में क्या-क्या? 7वें दिन भी जारी है खुदाई

इस बावड़ी का निर्माण बिलारी सहसपुर के राजा चंद्र विजय सिंह के शासनकाल में हुआ था. बावड़ी की देखरेख और इसके उपयोग का जिम्मा रानी सुरेंद्र बाला के पास था, जिन्हें यह रियासत के मैनेजर ने रहने के लिए दी थी.

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