नामांकन दाखिल करने का समय नजदीक आ रहा था और फाटक बंद होने से अनंत सिंह के चेहरे पर हल्की बेचैनी दिख रही थी. समर्थकों का जोश भी थोड़ा ठंडा पड़ने लगा, क्योंकि ट्रेन गुजरने में देर हो रही थी. कुछ उत्साही समर्थक तो लोको पायलट के पास पहुंच गए और बोले, "भाई, जरा जल्दी ट्रेन बढ़ाओ, छोटे सरकार को नामांकन में देरी हो रही है."
इकोनॉमिस्ट्स ने सोचा था कि सितंबर में इंफ्लेशन शायद 1.70% के आसपास रहेगा, लेकिन असल आंकड़े उससे भी बेहतर निकले. पिछले सात महीनों से इंफ्लेशन RBI के 4% टारगेट से नीचे चल रहा है, और ऐसा लगता है कि यह सस्ताई का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है.
Bihar Election 2025: ओम प्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से बिहार में अपनी पार्टी का आधार मजबूत करने में जुटे थे. उनकी नजर बिहार विधानसभा की उन सीटों पर थी, जहां राजभर समुदाय का प्रभाव है. खबरों के मुताबिक, बिहार की 38 सीटों में से 32 पर राजभर वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
Bihar Election 2025: उधर, महागठबंधन में सीट बंटवारे का सस्पेंस थ्रिलर फिल्म से कम नहीं. आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव गठबंधन को एकजुट रखने की जद्दोजहद में जुटे हैं, लेकिन मुकेश सहनी की वीआईपी (VIP) और कांग्रेस के बीच तनातनी थम नहीं रही. सहनी, न सिर्फ ज्यादा सीटें मांग रहे हैं, बल्कि डिप्टी सीएम का पद भी ठोक रहे हैं.
Bihar Politics: HAM को इस बार टिकारी, अतरी, बाराचट्टी, सिकंदरा, इमामगंज और कुटुंबा सीटें मिली हैं. इनमें से तीन सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. 2020 में HAM को 7 में से 4 सीटों पर जीत मिली थी, और दो सीटों पर वह दूसरे नंबर पर रही थी. इस बार मखदुमपुर सीट छिन गई, जबकि अतरी नई मिली है.
Bihar Assembly Election: एनडीए और महागठबंधन, दोनों खेमों में सीट बंटवारे को लेकर माथापच्ची जारी है. हर दल अपनी ताकत दिखाने और ज्यादा सीटें हथियाने की कोशिश में है. सूत्रों की मानें, तो अगले 1-2 दिन में सीटों का ऐलान हो सकता है.
Durgapur Crime: छात्रा ने किसी तरह अपने दोस्तों से संपर्क किया, जिन्होंने उसके माता-पिता को सूचना दी. शनिवार सुबह माता-पिता दुर्गापुर पहुंचे और तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज की. पीड़िता का इलाज पास के अस्पताल में चल रहा है, जहां उसकी हालत स्थिर लेकिन गंभीर बताई जा रही है.
Sampoorna Kranti: जेपी का सपना था एक ऐसा भारत, जहां भ्रष्टाचार और अन्याय न हो. लेकिन वो खुद कभी सत्ता का हिस्सा नहीं बने. न उन्होंने कोई चुनाव लड़ा, न ही कोई पद स्वीकार किया. एक बार पंडित नेहरू के बाद प्रधानमंत्री के लिए उनके नाम की चर्चा हुई, लेकिन जेपी ने साफ मना कर दिया. वो कहते थे, “मेरा काम जनता को जागृत करना है, सत्ता में बैठना नहीं.”
Pawan Singh on Bihar Election: पवन सिंह जैसे 'पावर स्टार' के लिए ये क्राउडेड स्टेज पर अपना कद छोटा करना मतलब करियर का फ्लॉप शो हो सकता है. वो जानते हैं कि लोकल फाइट में उलझकर उनका नेशनल हीरो वाला इमेज फीका पड़ जाएगा, इसलिए BJP का 'सच्चा सिपाही' बनकर प्रचार का रोल चुन लिया, रिस्क कम, ग्लोरी ज्यादा.
Trump Tariff: ट्रंप पहले भी चीन से नाराज रहे हैं. 2018-2020 में भी ट्रेड वॉर छिड़ा था, जब ट्रंप ने चीनी सामान पर 25% तक टैरिफ लगाया था. इस बार जून 2025 में रेयर अर्थ पर सहमति टूटी और ट्रंप को नोबेल प्राइज न मिलने का गुस्सा भी शायद इसमें जुड़ गया. वो चाहते हैं कि अमेरिका की फैक्ट्रियां फिर से गुलजार हों और 20 लाख नौकरियां बचे.