जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान भारतीय हाई कमीशन का भी दौरा किया. इस दौरे में उन्होंने वहां के अधिकारियों से मुलाकात की और भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत की.
इस बार चुनावी रणभूमि में बीजेपी के साथ शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) का गठबंधन है. 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 105 सीटें जीतकर राज्य में एक मजबूत स्थिति बनाई थी. इस बार भी पार्टी ने अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाने पर जोर दिया है.
यह ध्यान देने योग्य है कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मिलकर जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव लड़ा था और दोनों दलों की संयुक्त जीत ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं.
अब जैसे-जैसे चुनावों की तारीखें नजदीक आ रही हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग और राजनीतिक दल इस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे इस पर एक प्रभावी समाधान निकाल पाएंगे.
बीजेपी के इस चुनावी पहल ने अब सभी की नजरें इस बात पर लगा दी हैं कि आखिर कौन बनेगा पार्टी का नया अध्यक्ष. इस प्रक्रिया से न केवल पार्टी के आंतरिक संगठन में मजबूती आएगी, बल्कि यह आगामी चुनावों में बीजेपी की रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है.
इस साल के लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी ने वायनाड और उत्तर प्रदेश की रायबरेली दोनों सीटों पर चुनाव लड़ा था. उन्होंने दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन वायनाड सीट को छोड़ने का निर्णय लिया और रायबरेली से सांसद बने रहने का फैसला किया.
चुनाव आयोग ने झारखंड और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को समाप्त होगा, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर 2024 को खत्म हो रहा है.
एनडीए की एक और सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने भी इस यात्रा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. एलजेपी सांसद अरुण भारती ने कहा कि बीजेपी को हिंदू समाज के भीतर मौजूद जातिवादी कुरीतियों पर भी ध्यान देना चाहिए.
हाजी मस्तान का नाम अंडरवर्ल्ड के पहले डॉन के रूप में लिया जाता है. 1950 से 1970 के दशक तक मुंबई में सक्रिय रहा. उसका प्रभाव इतना था कि कई बड़े फिल्म निर्माता और अभिनेता उसके करीबी मित्र बन गए. मस्तान ने अंडरवर्ल्ड के व्यवसाय को एक नया मोड़ दिया और इसे एक बड़े स्तर पर स्थापित किया. उनके बाद करीम लाला का नाम आया, जो पठान गैंग का प्रमुख था.
सूत्रों के मुताबिक, इस डील के तहत भारतीय नौसेना को 15 ड्रोन दिए जाएंगे, जबकि वायुसेना और थलसेना को 8-8 ड्रोन आवंटित किए जाएंगे. ये सभी ड्रोन सशस्त्र होंगे और लंबी दूरी तक निगरानी और आक्रमण की क्षमता से लैस होंगे.