अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कनाडा में हुई थी. इसके बाद से कनाडा लगातार भारत पर इस हत्या में संलिप्त होने का आरोप लगा रहा है. हालांकि, कनाडा ने अब तक इस मामले में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं, फिर भी उसने भारत के उच्चायुक्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
रतन टाटा ने इन कंपनियों को कंगाली से निकालकर ऊंचाइयों तक पहुंचाया और साबित कर दिया कि उनकी नेतृत्व क्षमता कितनी अद्वितीय है.
वहीं, दूसरे आरोपी शिवकुमार उर्फ शिवा की मां सुमन ने भी अपने बेटे के बारे में बयान दिया. सुमन ने बताया कि उन्हें इस हत्याकांड की कोई जानकारी नहीं थी और सुबह ही उन्हें इस बारे में पता चला.
इन उपचुनावों का परिणाम केवल चुनावी नतीजों पर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर भी गहरा असर डालेगा. सभी दल अपने-अपने तरीके से अपनी शक्ति को पुनः स्थापित करने में जुटे हैं.
गिरफ्तार शूटरों ने क्राइम ब्रांच को बताया कि उन्हें बाबा सिद्दीकी की हत्या करने के लिए ढाई से तीन लाख रुपये की सुपारी मिली थी. यह वारदात शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे हुई. शूटरों ने छह गोलियां चलाईं, जिनमें से दो गोली बाबा सिद्दीकी के सीने में लगीं.
इसी बीच, कमाल राशिद खान (केआरके) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विवादित ट्वीट कर हलचल मचा दी. उन्होंने बिना बाबा सिद्दीकी का नाम लिए लिखा, "जैसी करनी, वैसी भरनी...
बाबा सिद्दीकी की इफ्तार पार्टी केवल सितारों की मौजूदगी के लिए ही मशहूर नहीं थी, बल्कि यहां कई पुरानी दुश्मनियां भी खत्म होती थीं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण शाहरुख खान और सलमान खान हैं. दोनों के बीच लंबे समय से चली आ रही अनबन को बाबा की पार्टी ने ही सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी.
इस बार का आयोजन और भी खास है क्योंकि एक चौथा पुतला भी लगाया गया है, जो महिलाओं पर अत्याचार करने वालों का प्रतीक है. इस चौथे पुतले के माध्यम से कमेटी ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है. हाल ही में कोलकाता में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते हजारों लोग चिकित्सा सेवाओं से वंचित रहे.
इस घटना से कुछ ही दिन पहले, इजरायल के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि ईरान के हालिया मिसाइल हमले का जवाब दिया जाएगा. उन्होंने कहा था कि इजरायल की ओर से किया जाने वाला पलटवार "घातक" और "आश्चर्यजनक" होगा.
नायब सिंह सैनी का हरियाणा का मुख्यमंत्री बनना एक बड़ा राजनीतिक कदम है. पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के इस्तीफे के बाद से सैनी के नाम पर मुहर लगी थी. सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं, और बीजेपी ने उनकी नियुक्ति के जरिए राज्य के सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया है.