अब कांग्रेस ने लाल सिंह को टिकट देने का निर्णय लिया है, जिसके बाद पार्टी की नीतियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. खासकर मुस्लिम नेताओं और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी (DPAP) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. DPAP ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के लिए यह शर्मनाक है कि उन्होंने बलात्कारियों के समर्थक को कांग्रेस में शामिल किया.
बंगाल सरकार ने डॉक्टरों से संपर्क साधने के लिए ईमेल भेजा है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल को मिलने के लिए आमंत्रित किया है. टीएमसी नेता और स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने कक्ष में प्रतिनिधियों का इंतजार किया, लेकिन डॉक्टरों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
उमर अब्दुल्ला ने इस बार गांदरबल और बडगाम सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. उमर के चुनावी अभियान में उनके बेटे जमीर और जाहिर की सक्रियता देखने को मिल रही है. हाल ही में हुए नामांकन की प्रक्रिया के दौरान भी, जब उमर ने गांदरबल और बडगाम में नामांकन पत्र भरा, उनके दोनों बेटे उनके साथ थे.
यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 23 अगस्त 2024 को यूक्रेन की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति जेलेंस्की से कहा था कि रूस और यूक्रेन को तुरंत मिलकर इस युद्ध को समाप्त करना चाहिए और भारत इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
इस नई तकनीक के लागू होने से यात्रियों को टोल टैक्स में राहत मिलेगी और यात्रा अधिक सुगम बनेगी. इसके अलावा, टोल प्लाजा पर गाड़ियों की लंबी कतारें भी कम होंगी, जिससे यात्रा के समय में भी कमी आएगी.
राशिद को चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होने की शर्त पर राहत दी गई है. जमानत की शर्तों के अनुसार, उन्हें अदालत के समक्ष नियमित रूप से पेश होना होगा और किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों से बचना होगा.
हाल ही में कन्हैया मित्तल ने दिल्ली में बीजेपी नेता मनोज तिवारी और नीलकांत बख्शी से मुलाकात की. मित्तल ने कहा कि वे नहीं चाहते कि किसी भी सनातनी का विश्वास टूटे.
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भिवानी जिले की तोशाम सीट, बंसीलाल के राजनीतिक साम्राज्य का एक अभिन्न हिस्सा रही है. 1967 से अब तक, इस सीट पर कुल 14 बार बंसीलाल या उनके परिवार के किसी सदस्य ने जीत दर्ज की है. बंसीलाल ने 7 बार यहां से चुनाव लड़ा और छह बार जीत हासिल की.
पवन सिंह ने इस विषय पर खुलकर बातचीत नहीं की. हालांकि, उन्होंने इसे स्वीकार किया कि भोजपुरी के कई लोग नहीं चाहते थे कि पवन सिंह आगे बढ़ें. लेकिन, पवन ने इसे नजरअंदाज करते हुए कहा, “लोगों ने मुझे वोट किया, और मैं हारने के बाद भी काराकाट जाता रहूंगा.”