WHO ने 14 अगस्त 2024 को एमपॉक्स को अंतरराष्ट्रीय चिंता बताते हुए स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था. वैश्विक प्रकोप की पहली घोषणा 2022 में की गई थी, जब दुनिया भर से मामले सामने आने लगे थे.
रिपोर्टों के अनुसार पिछले 10-11 वर्षों में राजधानी देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल समेत राज्य के चार जिलों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने न केवल बड़ी संख्या में जमीनें खरीदी हैं, बल्कि उनकी बसावट भी उसी गति से बढ़ी है.
बृज भूषण शरण सिंह ने कहा, "मेरे खिलाफ तीनों मामलों में मैं बाहर हूं. लखनऊ में दो मामले चल रहे हैं. गतिविधियों के क्रम से पता चलता है कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने किया था. गतिविधियों का क्रम कांग्रेस के खिलाफ है. विरोध महिलाओं की गरिमा के लिए नहीं था."
हालांकि, इस भंडार के व्यावसायिक लाभकारी साबित होने की गारंटी नहीं है. इसे निकालने और उपयोगी बनाने के लिए बड़ी मात्रा में निवेश की आवश्यकता होगी, और इसमें कई साल लग सकते हैं.
कांग्रेस नेता दीपक बाबरिया और आप सांसद राघव चड्ढा के बीच शनिवार को बाबरिया के आवास पर हुई बैठक बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई. बैठक के बाद दीपक बाबरिया ने कहा कि पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन उम्मीद है कि रविवार या अगले दिन तक कोई समाधान निकल सकता है. कांग्रेस 4-5 से अधिक सीटें देने को तैयार नहीं है, जबकि आप 10 सीटें चाहती है.
मई और जुलाई 1999 के बीच लड़े गए कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू और कश्मीर के कारगिल जिले में नियंत्रण रेखा के भारतीय हिस्से में घुसपैठ की थी. भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत इन घुसपैठियों को पीछे हटने पर मजबूर किया था.
पार्टी, जो राष्ट्रवाद के इर्द-गिर्द अपना नैरेटिव बनाती रही है और आतंकवाद के साथ-साथ हिंदुत्व को अपनी राजनीति का आधार बनाती रही है, अब चुनावी घोषणापत्र में लोकलुभावन वादे कर रही है.
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कुणाल घोष ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर दावा किया कि बिक्रम भट्टाचार्जी को उचित उपचार नहीं मिला. हालांकि, अस्पताल ने इन आरोपों का खंडन किया.
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 31 जुलाई को उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी और उन्हें भविष्य की परीक्षाओं से वंचित कर दिया था. खेडकर ने कथित तौर पर आरक्षण लाभ पाने के लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, 2022 के लिए अपने आवेदन में गलत जानकारी दी थी.
अखिलेश यादव इस एनकाउंटर केस के जरिए एक तीर से कई निशाने साध रहे हैं. लोकसभा चुनाव में जीत से उत्साहित अखिलेश अब साल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी अपने पीडीए-प्रयोग के साथ उतरना चाहते हैं. इसकी भूमिका लिखनी उन्होंने अभी से शुरू कर दी है.