युवाओं ने उन्हें चुना क्योंकि वो 'क्लीन' हैं, न कोई पार्टी लाइन, न भ्रष्टाचार का दाग. सोशल मीडिया सर्वे में उनका नाम टॉप पर आया. सुशीला कार्की ने पीएम बनने से पहले राष्ट्रपति, सेना चीफ और युवा नेताओं के सामने तीन शर्तें रखीं.
चेन्नई में होने वाला यह तीन दिवसीय आयोजन कई मायनों में अनूठा होगा. यहां दुनियाभर के कोस्ट गार्ड जहाज एक साथ खड़े होकर सलामी देंगे, जिसे इंटरनेशनल कोस्ट गार्ड फ्लीट रिव्यू कहा जाता है. इसके अलावा, विशेषज्ञ एक सेमिनार में नई तकनीकों और समुद्री बचाव के तरीकों पर अपने विचार साझा करेंगे.
लूटा कैश लोकतंत्र की लड़ाई में लगा और बाद में गिरिजा प्रसाद कोइराला चार बार नेपाल के पीएम बने. हाईजैक के बाद दुर्गा और उनके साथी मुंबई भागे, लेकिन वे पकड़े गए और उन्हें दो साल की जेल हुई.
ये कोई मामूली हादसा नहीं, बल्कि 'रिंग ऑफ फायर' का नया तमाचा है. ये वो घातक घेरा है जहां पृथ्वी की प्लेटें आपस में टकराती हैं और दुनिया के 80% भूकंप यहीं जन्म लेते हैं.
पीहू ने अपने पूरे इलाज के दौरान कभी हार नहीं मानी. फरवरी 2023 में कैंसर का पता चलने के बाद से, उन्होंने तीन सर्जरी करवाईं. उनके पति लक्ष्यराज और पूरा परिवार हर पल उनके साथ था. पिता नरपत सिंह बताते हैं कि पीहू पढ़ाई में बहुत होशियार थीं और उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की पढ़ाई की थी.
इतिहास गवाह है कि 2017 गुजरात में 'नीच' वाली गाली ने मोदी को 'पीड़ित नायक' बना दिया. यहां भी वही फॉर्मूला काम कर सकता है. पीएम मोदी लगातार गालियों को गहना और आलोचनाओं को सीढ़ी बनाकर सियासत की ऊंचाइयों पर चढ़ते गए. बिहार में भी यही खेला हो सकता है.
खबरों के अनुसार, नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा के सभी सदनों के नेताओं की एक बैठक भी बुलाई है, ताकि आगे की रणनीति पर चर्चा हो सके.
Raebareli DISHA Meeting: बैठक में एक और ट्विस्ट तब आया, जब ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय ने इसका बहिष्कार कर दिया. मनोज ने राहुल पर निशाना साधा. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "राहुल गांधी ने सांसद बनने के बाद संसद में रायबरेली के लिए कितनी बार आवाज उठाई? वो अपने कामों की लिस्ट बताएं."
महागठबंधन में RJD और कांग्रेस के अलावा लेफ्ट पार्टियां, मुकेश सहनी की VIP, पशुपति पारस की LJP और हेमंत सोरेन की JMM भी शामिल हैं. नए दोस्तों के आने से सीटों का बंटवारा और पेचीदा हो गया है. RJD और कांग्रेस को अपनी कुछ सीटें इन नए सहयोगियों को देनी पड़ेंगी, जिससे सियासी समीकरण और मजेदार हो गए हैं.
8 सितंबर को काठमांडू की सड़कें रणक्षेत्र बन गईं. स्कूल यूनिफॉर्म और किताबें हाथ में लिए हजारों छात्र संसद भवन की ओर बढ़े. ‘हामी नेपाल’ नाम के एनजीओ के अध्यक्ष सुदान गुरुंग ने इस प्रदर्शन को लीड किया. उनकी एक अपील ने लाखों युवाओं को सड़कों पर ला दिया. लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गया. पुलिस की गोलीबारी और झड़प में अब तक 34 लोगों की जान चली गई. इस खून-खराबे ने सुदान को झकझोर कर रख दिया.