राहुल गांधी की विदेश यात्राएं पहले भी चर्चा का विषय रही हैं. कई बार उनकी यात्राओं को लेकर सवाल उठे हैं कि वो किससे मिलते हैं और क्या करते हैं? कुछ लोग इसे उनकी निजी जिंदगी का हिस्सा मानते हैं, तो कुछ इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं. इस बार CRPF की चेतावनी ने इस बहस को और हवा दे दी है.
Nepal GenZ Protests: 54 साल के कुलमन घीसिंग कोई साधारण शख्स नहीं हैं. ये वो इंसान हैं, जिन्होंने काठमांडू घाटी में सालों से चली आ रही बिजली कटौती की समस्या को जादू की तरह खत्म कर दिया था. 2016 में जब वो नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) के प्रमुख बने, तो उन्होंने 12-18 घंटे की लोडशेडिंग को इतिहास की बात बना दिया.
Gujarat Factories Bill 2025: अगर आप 12 घंटे से ज्यादा काम करते हैं या छुट्टी के दिन काम पर आते हैं, तो आपको डबल सैलरी मिलेगी. इतना ही नहीं, पहले जहां तीन महीने में 75 घंटे ओवरटाइम मिलता था, अब यह बढ़कर 125 घंटे हो गया है.
Cross Voting Controversy: अभिषेक बनर्जी ने स्वीकार किया कि इस बात की संभावना है कि कुछ सांसदों ने क्रॉस-वोटिंग की हो, यानी उन्होंने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर वोट दिया हो. उन्होंने कहा, "यह कहना मुश्किल है कि अवैध घोषित किए गए 15 वोट किस खेमे के थे. लेकिन अगर इन वोटों में से आधे-आधे भी बांटें, तो भी कुछ सांसदों ने क्रॉस-वोटिंग की होगी."
नेपाल भारत और चीन के बीच एक रणनीतिक बफर है. यहां की अस्थिरता भारत के लिए सीधा खतरा है, लेकिन चीन और अमेरिका के लिए मौका. दरअसल, नेपाल में चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत सड़कों, रेलवे और बांधों में भारी पैसा लगाया है. 2023 तक चीन नेपाल का सबसे बड़ा निवेशक बन चुका था.
ये प्रदर्शन जनरेशन-जेड के नेतृत्व में हो रहे हैं, जो सरकार और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं. प्रदर्शनकारी सरकार के भ्रष्टाचार और हाल ही में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. हालांकि सरकार ने सोशल मीडिया बैन हटा लिया, लेकिन गुस्सा कम नहीं हुआ.
नेपाल में केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद देश का राजनीतिक सिस्टम एक नाजुक मोड़ पर है. संवैधानिक प्रक्रिया के तहत, राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल अब नई सरकार के गठन के लिए संसद में बहुमत साबित करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे.
नेपाल की सड़कों पर Gen-Z का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा. 20 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत और सैकड़ों घायल होने के बाद भी आंदोलन और तेज हो रहा है. सरकार ने सेना बुला ली है, लेकिन सवाल ये है कि क्या दमन से ये क्रांति रुकेगी? युवा भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आजादी पर पाबंदी के खिलाफ एकजुट हो चुके हैं.
यह वर्कशॉप खास तौर पर उपराष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले आयोजित की गई है, जिसमें बीजेपी सांसदों को मतदान की प्रक्रिया और रणनीति के बारे में ट्रेनिंग दी जा रही है.
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने हाल ही में अपने नेताओं को भड़काऊ और अपमानजनक बयानों से बचने की सख्त हिदायत दी थी. ममता ने कहा था कि ऐसी बयानबाजी से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता है. लेकिन बख्शी का ताजा बयान उनकी चेतावनी को ठेंगा दिखाता नजर आ रहा है.