पहली बार बिहार में कांग्रेस और आरजेडी के दो सबसे बड़े नेता एक साथ, कंधे से कंधा मिलाकर इतने लंबे समय तक सड़क पर रहेंगे. यह यात्रा न केवल चुनावी समीकरणों को बदलने की कोशिश है, बल्कि एक बड़ा जन आंदोलन बनाने का प्रयास भी है, जिसका केंद्र बिंदु है 'मतदाता सूची में कथित धांधली' का मुद्दा.
बादल फटने की घटनाएं बिना किसी चेतावनी के होती हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता है. सड़कें, पुल और घर तबाह हो जाते हैं. भूस्खलन और बाढ़ से गांव बाकी दुनिया से कट जाते हैं. कठुआ में भी यही देखने को मिला, जहां गांवों का संपर्क टूट गया और कई लोग मलबे में फंस गए.
रविवार सुबह जब लोग अपने-अपने घरों में थे, तभी अचानक गोलियों की आवाज़ से पूरा इलाका थर्रा उठा. एल्विश यादव के घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई. हालांकि, गनीमत यह रही कि इस घटना के वक्त एल्विश अपने घर पर मौजूद नहीं थे.
जैसे ही बादल फटने की खबर फैली, किश्तवाड़ का प्रशासन हरकत में आ गया. उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि बचाव टीमें तुरंत चशोती के लिए रवाना हो गईं. सेना, पुलिस, NDRF और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें मिलकर लोगों को सुरक्षित निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटी हैं.
इस 'महाभारत' में और भी कई महारथी शामिल हुए. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बेशक कुत्ते काटते हैं, लेकिन इस साल दिल्ली में रेबीज से एक भी मौत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि सिर्फ डर के आधार पर ऐसा सख्त कदम उठाना ठीक नहीं है.
सीएम योगी ने यूपी की प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे राज्य ने बीते कुछ सालों में अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि 2016-17 में यूपी की जीएसडीपी महज 13 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब 2025 के अंत तक 35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है.
त्रासदी की खबर मिलते ही उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार हरकत में आ गई. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद रेस्क्यू ऑपरेशन पर नजर रखी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिया. सेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं. लेकिन रास्ता इतना आसान नहीं था.
पुलिस लगातार इनकी तलाश में थी. गुरुवार तड़के एसटीएफ और सीतापुर पुलिस को इन दोनों के पिसावा इलाके में छिपे होने की खबर मिली. पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की. खुद को घिरा देखकर बदमाशों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं.
बादल से गिरने वाला पानी बारिश की तरह नहीं होता, बल्कि एक तेज़ धार की तरह होता है. इसकी गति 50 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है. जब यह तेज़ रफ़्तार पानी पहाड़ की ढलानों से नीचे उतरता है तो इसकी गति और भी बढ़ जाती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज़ को अपने साथ बहा ले जाता है.
तेज प्रताप भी छोटे दलों के साथ मिलकर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. जिस तरह कुशवाहा ने मुख्यमंत्री बनने का दावा किया था, उसी तरह तेज प्रताप भी अपनी अलग राह पर चल पड़े हैं. क्या उनकी कहानी भी कुशवाहा जैसी होगी, या वह कुछ नया कर दिखाएंगे?