शुरुआत में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कुछ संदिग्धों के स्केच जारी किए थे, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी. लेकिन बाद में NIA ने साफ किया कि असली हमलावर कोई और थे. सुरक्षाबलों ने इन आतंकियों की पहचान कई ठोस सबूतों के आधार पर की.
लालू बिहार को एकजुट रखना चाहते थे, जबकि शिबू का सपना था अलग झारखंड. दोनों के बीच सियासी तलवारें खिंचती रहीं, लेकिन JMM की बढ़ती ताकत और केंद्र का दबाव आखिरकार लालू को झुकने पर मजबूर कर गया. इस दौरान शिबू पर कई आरोप भी लगे. 1975 का चिरूडीह कांड उनकी राह में कांटा बना.
इस हमले में स्पाइसजेट के चार कर्मचारी घायल हो गए. एक कर्मचारी को इतनी गंभीर चोटें आईं कि उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया और जबड़े में भी गंभीर चोटें आई हैं. बताया गया है कि वह कर्मचारी बेहोश होकर जमीन पर गिर गया, लेकिन अधिकारी ने उसे तब भी लात मारी.
भारत की जीडीपी भले बढ़ रही हो, लेकिन इसका फायदा सबको बराबर नहीं मिल रहा. 2011-12 में 27% लोग गरीबी रेखा के नीचे थे, और आज भी 24% लोग गरीबी में जी रहे हैं. यानी हालात में बहुत बदलाव नहीं आया. पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी मिलना मुश्किल है. जो नौकरियां मिलती भी हैं, उनमें तनख्वाह और काम की गुणवत्ता अक्सर खराब होती है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिवार को 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. साथ ही, उन्होंने घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं.
साल 1999, लांजारोन के तत्कालीन मेयर होसे रूबियो ने एक आधिकारिक घोषणा पत्र जारी किया. इसमें उन्होंने गांव के नागरिकों से आग्रह किया कि जब तक नगरपालिका एक नया कब्रिस्तान बनाने की व्यवस्था नहीं कर लेती, तब तक वे 'मरने से बचें'.
एक हफ्ते बाद जब ननों को जमानत मिली, तो मानो सभी राजनीतिक दलों में क्रेडिट लेने की होड़ मच गई. बीजेपी की तरफ से केरल बीजेपी के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने खुद को इस लड़ाई का अगुवा साबित करने की कोशिश की. उन्होंने पार्टी महासचिव अनूप एंटनी को छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री से मिलने भेजा और जमानत मिलने के बाद ननों से भी मुलाकात की.
सीमांचल की कहानी तो और भी दिलचस्प है. भारत-नेपाल सीमा पर बिहार के कई लोग ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते से जुड़े हैं. यानी, बिहार की बेटियां शादी के बाद नेपाल चली गईं, और उनका नाम यहां की वोटर लिस्ट से हट गया. वहीं, कुछ लोग नेपाल, बांग्लादेश या म्यांमार से जुड़े होने के कारण भी लिस्ट से बाहर हुए.
थरूर ने कहा कि उपराष्ट्रपति चुनाव में सिर्फ संसद के दोनों सदन (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य ही वोट देते हैं. इसमें राज्यों के विधायक वोट नहीं करते. चूंकि संसद के दोनों सदनों में सत्तारूढ़ दल के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए उनके उम्मीदवार की जीत लगभग तय है.
ये वीडियो आग की तरह फैला और देखते ही देखते यह मामला एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया. समाज में आक्रोश इतना बढ़ गया कि महिलाओं के संगठनों और विपक्षी पार्टियों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की.