इस मामले में जगदीप धनखड़ ने बड़े ही दिलचस्प तर्क दिए थे. उन्होंने न सिर्फ पुलिस की जांच पर सवाल उठाए, बल्कि यह भी कहा कि सलमान खान जांच में पूरा सहयोग कर रहे थे, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए थी.
दुर्भाग्य से, यह कोई अकेली घटना नहीं है. बीते कुछ महीनों में देश के अलग-अलग कोनों से भगदड़ की कई ऐसी खबरें आई हैं, जिन्होंने लोगों को चौंका दिया है.
पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि सिर्फ अंतरिक्ष ही नहीं, ज्ञान के क्षेत्र में भी हमारे बच्चे कमाल कर रहे हैं. हाल ही में हुए इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड में देवेश पंकज, संदीप कुची, देबदत्त प्रियदर्शी और उज्जवल केसरी ने मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया.
थाईलैंड के पास 3.6 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि कंबोडिया के पास सिर्फ़ 1.7 लाख. इन आंकड़ों को देखकर लगता है कि थाईलैंड कंबोडिया को आसानी से कुचल देगा, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा.
पीएम मोदी के बाद दूसरे नंबर पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग हैं, जिन्हें 59% लोगों ने पसंद किया. दिलचस्प बात यह है कि ली जे म्युंग को पद संभाले अभी एक ही महीना हुआ है, और इतने कम समय में इतनी ऊंची रैंकिंग पाना वाकई बड़ी बात है.
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'नल जल योजना' भी कई जिलों में इस सूखे के आगे बेबस दिख रही है. भूजल स्तर में भारी गिरावट के कारण कई जगहों पर नलों में पानी नहीं आ रहा है, जिससे घर-घर पानी पहुंचाने का वादा अधूरा रह गया है.
होमो एन्टिसेसर वो आदिमानव थे जो आज से लगभग 12 लाख से 8 लाख साल पहले धरती पर रहते थे. ये हम आधुनिक इंसानों से थोड़े छोटे और मज़बूत होते थे. इनका दिमाग भी आज के इंसानों से थोड़ा छोटा था. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये दाहिने हाथ का इस्तेमाल करते थे और शायद सांकेतिक भाषा भी बोलते थे.
विवाद बढ़ने पर स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने एक नया वीडियो जारी कर माफी मांगी. उन्होंने सफाई दी कि वायरल हुआ वीडियो AI से बनाया गया है और उनके मूल विचारों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है.
CJI गवई ने कहा कि जजों को वकीलों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि अदालतें दोनों की साझा जगह हैं. उन्होंने जूनियर वकीलों को भी नसीहत दी, "कई बार देखता हूं कि 25 साल का वकील कुर्सी पर बैठा होता है और जब 70 साल के सीनियर वकील आते हैं, तो उठता भी नहीं. थोड़ी तो शर्म करो, सीनियर का सम्मान करो."
इस युद्ध की पहली आहट एक आम आदमी ने पहचानी. मई 1999 में ताशी नामग्याल नाम के एक स्थानीय चरवाहे ने बटालिक इलाके में कुछ संदिग्ध हरकतें देखीं. उन्होंने देखा कि कुछ ऐसे लोग, जो आसपास के लग नहीं रहे थे, हमारी चोटियों पर डेरा डाल रहे थे. ताशी ने बिना देर किए भारतीय सेना को खबर दी.