यह वही एयरपोर्ट है जिसे 2024 में दुनिया का सबसे अच्छा एयरपोर्ट चुना गया था. और इसकी वजह थी सामान का प्रबंधन. इस एयरपोर्ट पर पिछले दस सालों से ज़्यादा समय से एक भी सामान गुम नहीं हुआ है.
इस कहानी की शुरुआत होती है मियापुर के एक बिजनेसमैन फणिंद्र शर्मा की शिकायत से. उन्होंने आरोप लगाया कि कई बड़े फिल्मी चेहरे और सोशल मीडिया स्टार्स लोगों को इन सट्टेबाजी ऐप्स की तरफ खींच रहे हैं. शर्मा ने बताया कि इन ऐप्स से मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास परिवारों को काफ़ी नुकसान हो रहा है.
अमित शाह ने मंत्री के रूप में अपनी यात्रा के बारे में बात करते हुए एक चौंकाने वाली बात कही. उन्होंने बताया कि जब वह गृह मंत्री बने, तो सबने कहा कि उन्हें बहुत महत्वपूर्ण विभाग मिला है. लेकिन जिस दिन उन्हें सहकारिता मंत्री बनाया गया, उन्हें लगा कि उन्हें गृह मंत्रालय से भी बड़ा विभाग मिल गया है.
याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने अपनी दलीलें रखीं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' अभियान नियमों के खिलाफ है और ये मनमाना फैसला है.
छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को एटीएस ने हाल ही में गिरफ्तार किया है. बाबा पर पहले से ही 50,000 रुपये का इनाम घोषित था और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी था. दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद लखनऊ जिला जेल भेज दिया गया है. इसी मामले में जमालुद्दीन और महबूब नाम के दो अन्य आरोपी पहले ही 8 अप्रैल को गिरफ्तार किए जा चुके हैं.
बुधवार रात 7 बजे से गुरुवार सुबह 7 बजे तक गुरुग्राम में कुल 133 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. इसमें भी, रात 7:30 बजे से 9:00 बजे के बीच, सिर्फ डेढ़ घंटे में 103 मिलीमीटर बारिश हुई.
सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव धरती पर ही वास करते हैं और भक्तों की प्रार्थनाएं सीधे सुनते हैं. इसलिए सावन के सोमवार का विशेष महत्व है, और इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव की उपासना करते हैं.
दिल्ली-NCR में भूकंप के झटके कोई नई बात नहीं हैं. दरअसल, ये इलाका सिस्मिक जोन IV में आता है, जिसका मतलब है कि यहां भूकंप आने की संभावना काफी ज़्यादा रहती है. पिछले कुछ सालों में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में कई बार भूकंप के छोटे-मोटे झटके महसूस किए गए हैं.
मुंबई का ये तनाव नया नहीं है, लेकिन हर बार ये देश की एकता पर सवाल उठाता है. 1960 से शुरू हुई मराठी अस्मिता की लड़ाई आज सियासी स्वार्थ की भेंट चढ़ रही है. राज और उद्धव की सियासत बिहारियों-यूपी वालों को निशाना बना रही है, लेकिन अगर ये लोग सचमुच चले गए, तो मुंबई का दिल धड़कना बंद हो सकता है.
इस दिल दहला देने वाली वारदात का पता तब चला, जब पड़ोसियों को घर के भीतर से कुछ गड़बड़ महसूस हुई. उन्होंने अंदर जाकर देखा तो सोनल और यशिका की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं. तुरंत ही उन्होंने पुलिस को सूचना दी.