रुआंगसाक उस समय सिर्फ 20 साल के थे और सीट नंबर 11A पर बैठे थे. वह उन 45 लोगों में शामिल थे, जो इस हादसे से बच निकले. आज 47 साल की उम्र में रुआंगसाक उस खौफनाक दिन को याद करते हुए कहते हैं, “जब मैंने सुना कि अहमदाबाद हादसे का इकलौता बचा शख्स भी मेरी सीट 11A पर था, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए. मैं उन सभी लोगों के लिए दुखी हूं, जिन्होंने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोया.”
एयर इंडिया ने सफाई दी कि वो यात्रियों के लिए वैकल्पिक इंतजाम कर रहे हैं. जहां जरूरत पड़ रही है, वहां होटल की सुविधा भी दी जा रही है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये इंतजाम काफी हैं? जब यात्री घबराए हुए हों, तब उन्हें सही जानकारी और सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है.
1949 में बिहार के फुलपरास प्रखंड के गोरगमा गांव में एक मजदूर परिवार में जन्मे मंगनी लाल मंडल की कहानी अलग है. खेत-खलिहानों से निकलकर सियासत की ऊंची मंजिल तक पहुंचने वाले मंगनी लाल ने अपनी जिंदगी में मेहनत और जुनून को हमेशा साथ रखा.
इजरायल की थल सेना के पास 1,370 टैंक हैं, जिनमें ज्यादातर मर्कवा टैंक हैं. ये टैंक मध्य पूर्व के युद्धों के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए हैं. इसके अलावा 43,407 बख्तरबंद वाहन और 150 रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम हैं.
अब बात भारत की. इजरायल और ईरान, दोनों के साथ भारत के रिश्ते बेहद मजबूत हैं. इजरायल के साथ भारत की दोस्ती तो खास है. 1992 में राजनयिक संबंध शुरू होने के बाद दोनों देशों ने रक्षा, तकनीक और आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर कंधे से कंधा मिलाकर काम किया.
मामला यहीं नहीं रुका. बकरीद से ठीक पहले धुबरी में कुछ पोस्टर नजर आए, जिन्हें 'नबीन बांग्ला' नामक संगठन ने लगाया था. इन पोस्टरों में धुबरी को बांग्लादेश में मिलाने की बात कही गई थी. यह खबर सुनकर लोगों का गुस्सा और भड़क गया.
कोविड के दौरान 2020 में भी आंदोलन हुआ, जो शांतिपूर्ण रहा. 2022 में आंदोलन के सबसे बड़े चेहरा, कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला दुनिया से चले गए. उनकी विरासत अब उनके बेटे विजय बैंसला संभाल रहे हैं. अब 5 साल बाद एक बार फिर आरक्षण के मुद्दे पर गुर्जर समुदाय की महापंचायत होने वाली है.
आज भारतीय महिलाएं विज्ञान, शिक्षा, खेल, स्टार्टअप और यहां तक कि सशस्त्र बलों जैसे हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं. वे न सिर्फ खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि लाखों अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं कि सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करें.
पिता ने हिम्मत जुटाकर उस बंद मकान का दरवाजा खटखटाया, फिर ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुए. अंधेरे कमरे में एक पुराना, धूल भरा सूटकेस पड़ा था, जो थोड़ा खुला हुआ था. जैसे ही उन्होंने उसे खोलकर देखा, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई.
यहीं पर आती है भारत की बढ़ती 'धाक' की बात. G-7 की मेजबानी करने वाला देश अपनी मर्जी से कुछ अन्य देशों को आमंत्रित करता है जो समूह का हिस्सा नहीं होते. 2019 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल बतौर मेहमान G-7 देशों की बैठक में हिस्सा लेते आए हैं.