राकेश कुमार

[email protected]

राकेश कुमार विस्तार न्यूज़ में वरिष्ठ उप संपादक सह संवाददाता के पद पर हैं. यहां वो डेटा स्टोरीज, एक्सप्लेनर के अलावा इन डेप्थ खबरों पर काम करते हैं. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल कर चुके राकेश को रिसर्च में इंटरेस्ट है. इन्हें राजनीति के अलावा बिजनेस, मनोरंजन और लीगल न्यूज स्टोरीज पर काम करना पसंद है. काम के इतर बात करें, तो राकेश को खाली वक्त में फिल्में, क्रिकेट खेलने और किताब पढ़ने में मजा आता है. पूर्व में राकेश सहारा समय नेशनल न्यूज़ चैनल, फीवर FM, APN न्यूज़ और भारत एक्सप्रेस जैसे संस्थानों से जुड़े थे.

Trump-Zelensky Clash

Trump से बहस कर Zelensky ने खोद ली यूक्रेन की कब्र! बिना अमेरिकी मदद के रूस से युद्ध आसान नहीं

Trump-Zelensky Clash: बीती रात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बहस ने इस मुद्दे को और भी जटिल बना दिया है. क्या होगा अगर अमेरिका यूक्रेन की मदद पूरी तरह से बंद कर दे? क्या यूक्रेन इस युद्ध को बिना अमेरिकी सहायता के जारी रख पाएगा?

Share Market

शेयर बाजार में हाहाकार, टूट गया 30 साल पुराना रिकॉर्ड, निवेशकों के 92 लाख करोड़ स्वाहा

अगर बात करें बीएसई के टॉप 30 शेयरों की, तो इनमें से 28 शेयरों ने निवेशकों को सबसे ज्यादा दर्द दिया है. टाटा मोटर्स का शेयर सबसे ज्यादा गिरा, जो 35% नीचे आ गया है. इसके बाद एशियन पेंट्स (32%), पावरग्रिड (30%), और इंडसइंड बैंक (28%) के शेयर भी भारी नुकसान में रहे.

supreme court

“वजन घटाने के लिए क्यों न इन्हें अंदर ही रखा जाए…”, वकील की अजीब दलील सुन भड़कीं SC की जज बेला एम त्रिवेदी

जस्टिस बेला त्रिवेदी का जन्म 10 जून 1960 को पाटण, गुजरात में हुआ था. वे एमएस यूनिवर्सिटी, वडोदरा से अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद 1980 में वकील बनीं. शुरुआती दिनों में उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट में वकालत की और इसके बाद कई महत्वपूर्ण केसों में काम किया.

EPFO

EPFO के 7.6 करोड़ सदस्य होंगे खुश! सरकार ने बढ़ाया ब्याज दर

साल 2022 में EPFO ने अपने 7 करोड़ से अधिक ग्राहकों के लिए ब्याज दरों में कटौती की थी और उसे 8.1% कर दिया था, जो 40 सालों में सबसे कम दर थी. हालांकि, अब यह दर फिर से 8.25% तक पहुंच गई है, जो एक अच्छा संकेत है.

Sambhal Mosque Re-Survey

संभल मस्जिद के स्ट्रक्चर में हुआ बदलाव, ASI रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने दिया दोबारा सर्वे का आदेश

ASI की रिपोर्ट के मुताबिक, जामा मस्जिद में कई बदलाव किए गए हैं, जिनमें प्रमुख बदलाव मस्जिद की फर्श के टाइल्स और पत्थरों में देखे गए हैं. इसके अलावा, मस्जिद के विभिन्न हिस्सों में सुनहरे, लाल, हरे और पीले रंग की मोटी तामचीनी पेंटिंग की गई है.

Bihar Politics

नीतीश को ‘शिंदे’ बनाना आसान नहीं…फिर भी धीरे-धीरे बिहार में ‘बड़ा भाई’ बन रही है BJP!

अगर हम इतिहास की बात करें, तो 20 साल पहले जेडीयू के पास बीजेपी से दोगुना अधिक मंत्री हुआ करते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. 2020 में जेडीयू के पास 19 मंत्री थे और बीजेपी के पास सिर्फ 7 मंत्री. धीरे-धीरे जेडीयू के मंत्री घटते गए, और बीजेपी के मंत्री बढ़ते गए. आज जेडीयू के मंत्री सिर्फ 13 हैं, जबकि बीजेपी के 21 मंत्री हैं.

Trump Gold Card

पैसे से खरीदें नागरिकता! अमीरों का सिर्फ ट्रंप ही नहीं कर रहे हैं स्वागत, इन देशों में भी बिछा है ‘रेड कार्पेट’

मेरिका अकेला ऐसा देश नहीं है जो इस तरह की सुविधा दे रहा है. दरअसल, दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में निवेश के जरिए नागरिकता पाने की सुविधा है. ब्रिटिश एडवाइजरी फर्म ‘Henley and Partners’ के मुताबिक, कई देश ऐसे हैं जो आपको एक मोटी रकम निवेश करने के बाद अपनी नागरिकता दे देते हैं, और इसके साथ ही आप वहां के सभी नागरिक अधिकारों का आनंद ले सकते हैं.

CAG Report

14 अस्पतालों में ICU नहीं, 12 में एंबुलेंस गायब…दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिकों का भी बद से बदतर हाल, CAG रिपोर्ट ने खोल दी AAP की पोल!

तक दिखाई नहीं दिए. क्या यह सिस्टम की असफलता नहीं है? आराम फरमाती सरकार! दिल्ली के अस्पतालों में एक और बड़ी समस्या सामने आई, वह है बेड की कमी. दिल्ली सरकार ने 2016 से 2021 के बीच 32,000 बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में सिर्फ 1,357 बेड जोड़े गए, जो कि कुल लक्ष्य का 4.24% है! इससे साफ है कि जब अस्पतालों में बेड नहीं हैं, तो मरीजों को फर्श पर इलाज करना पड़ा.

Telangana Tunnel Collapse

तेलंगाना के सुरंग में 8 मजदूरों की एक हफ्ते से हलक में अटकी जान, बाहर निकालने में रैट माइनर्स भी नाकाम

जेट इंजेक्शन, सुरंग के अंदर खतरनाक स्थिति में पहुंचने के लिए ड्रिलिंग और स्नैक रैट माइनर्स को लाना – अब तक बेअसर साबित हो रही हैं. पानी और कीचड़ से भरी इस सुरंग में तक़नीकी उपाय नाकाम हो गए हैं. सबसे पहले रैट माइनर्स को बुलाया गया, जो छोटे स्थानों में फंसे लोगों को बाहर निकालने में माहिर होते हैं.

Maha Kumbh 2025

क्या लालू और ममता के बहकावे में आ गए राहुल गांधी? महाकुंभ से परहेज कांग्रेस को पड़ सकता है भारी!

राहुल गांधी का महाकुंभ से अचानक पीछे हटना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक कदम था. ममता बनर्जी, लालू यादव और अन्य विपक्षी नेताओं के दबाव को देखते हुए, राहुल गांधी ने इस बार महाकुंभ से दूरी बनाना बेहतर समझा. तो, क्या यह एक सही रणनीति थी? क्या राहुल गांधी का यह कदम भविष्य में कांग्रेस को लाभ पहुंचाएगा? ये सवाल अभी के लिए अनसुलझे हैं...

ज़रूर पढ़ें