Ambikapur: बेटा बनकर बहू दे रही सास-ससुर का साथ, पति की मौत के मुआवजे का 1 लाख रुपये खा गए दलाल
अंबिकापुर सास-बहु के मामले में खुलासा
Ambikapur: छत्तीसगढ़ की सरगुजा जिले के में मैनपाट की सास बहू का जो वीडियो वायरल हुआ है. उसकी कई इनसाइड कहानी है. विस्तार न्यूज़ मैनपाट की कुनिया ग्राम पंचायत में पहुंचकर सास सोमारी और बहू सोनमनिया के उस वायरल वीडियो की पड़ताल की जिसमें सोनमनिया अपनी सास को पेंशन का रुपये आहरित करने अपने पीठ पर ढोकर सेन्ट्रल बैंक जा रही थी. पड़ताल में खुलासा हुआ कि घर में सोनमनिया और उसकी सास के साथ उनका ससुर शनीराम रहते हैं, लेकिन सात साल पहले सोनमनिया के पति मनबोध की मौत हो गई, वह नाला पार कर अपने घर आ रहा था तभी नाला में डूबने से उसकी मौत हो गई थी. मौत के दो साल बाद उसका चार लाख रुपये मुआवजा स्वीकृत हुआ. इसकी जानकारी स्थानीय दलालों को लगी और वे सुखमनिया के घर पहुंचे और कहने लगे कि हमने कागजी कार्यवाही पूरा कराकर मुआवजा दिलाया है और इसके बाद एक लाख रुपये को उन्होंने ले लिया. बुजुर्ग दम्पति साफ पानी के लिए तरस रहे थे और सरकार वहां कोई बोरवेल नहीं करा सकी, इस पर मुआवजा के रुपये से मिले एक लाख रुपये से बोरवेल कराया.
पति की मौत के मुआवजे का 1 लाख रुपये खा गए दलाल
विस्तार न्यूज़ जब सुखमनिया के घर पहुंची तो पता चला कि सुखमनिया के पति के नाम पर प्रधानमंत्री आवास के तहत मकान स्वीकृत हुआ, मकान अब भी अधूरा पड़ा हुआ है. मकान का सिर्फ दिवार खड़ा है, लेकिन आज तक छत का ढलाई नहीं हुआ और उसका पैसा भी दलाल खा गए. ऐसे में सास ससुर और उसकी बहू घास-फूंस वाले मकान में रह रहें हैं, बारिश होने वाली है ऐसे में उन्हें चिंता सता रही है.
आज भी नहीं बना पीएम आवास
सुखमनिया के घर में शौचालय तक नहीं बना है, और ऐसे कई माझी परिवार हैं जो ऐसी ही समस्या से जूझ रहें हैं. दूसरी तरफ उज्जवला योजना का इनके घर में कोई पता नहीं है, लकड़ी का चूल्हा ही सहारा है, हां इनके घर तक बिजली जरूर पहुंच गई है.
ये भी पढ़ें- अयोध्या तीर्थ यात्रा के नाम पर 75 ग्रामीणों से लाखों की ठगी, फरार आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
सुखमनिया का घर कुनिया के जंगल पारा में है, यहां तक आने के लिए सड़क नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में इनके घर तक एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाता है, बुजुर्गो के बीमार होने पर पड़ोस और परिवार के लोग चारपाई में ढोकर उन्हें अस्पताल लेकर जाते है. वहीं सबसे बड़ी बात अगर सुखमिया के घर तक आने के लिए सड़क और नाला में पुल होता तो सुखमनिया के पति की डूबने से मौत नहीं हुई होती और न ही आज इस परिवार की ऐसी दर्दभरी तस्वीर दिखती.