Ambikapur: स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मार्केटिंग कंपनियों के लिए कर रहे काम, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ इंक्रीमेंट रुका

सरगुजा जिले के स्वास्थ्य विभाग में खुलेआम अंधेरगर्दी चला रहा है. कर्मचारी मार्केटिंग कंपनियों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और जब कार्रवाई की बात आती है तो सिर्फ इंक्रीमेंट रोका जाता है.
Ambikapur Health department

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धौरपुर

Ambikapur: सरगुजा जिले के स्वास्थ्य विभाग में खुलेआम अंधेरगर्दी चला रहा है. यहां पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपने विभाग का काम छोड़कर निजी कंपनियों के लिए मार्केटिंग और प्रमोशन का काम खुलेआम कर सकते हैं. ऐसा करने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी और अगर जांच टीम बनाई भी जाती है तो उन्हें क्लीन चीट मिल जाएगा ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले दिनों स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ निजी कंपनी के लिए काम करने का मामला सामने आया था और इसके बाद उनका सिर्फ दो दो इंक्रीमेंट रोका गया है.

कर्मचारियों को क्लीन चीट

बता दें कि निजी कंपनी का मार्केटिंग का खुलासा के बाद स्वास्थ्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर ने जांच टीम गठित करने का आदेश मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी को दिया था. जिस पर मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी ने ऐसी जांच रिपोर्ट तैयार कराई जिससे मार्केटिंग करने वाले कर्मचारियों को क्लीन चीट मिल सके और जब इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर को लगी तब उन्होंने फिर से नई जांच टीम गठित की थी.

अब तक कोई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं

जॉइंट डायरेक्टर के कड़े एक्शन मूड को देखते हुए जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने फिर से दूसरी बार जांच टीम गठित कर दी लेकिन हद तो यह है कि इसे लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी अब तक कोई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही निजी कंपनियों के लिए काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी स्वयंवर सिंह और प्रियंका सिंह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है. अधिकारी कर्मचारी कहने लगे हैं कि जिस अधिकारी कर्मचारी की विभाग में जितनी अच्छी पकड़ है वह उसी तरह मनमर्जी कर सकता है और पकड़ बनाने के लिए लापरवाह कर्मचारी क्या करते हैं किसी से नहीं छिपा है.

बता दें कि स्वास्थ कर्मचारी स्वयंवर सिंह और प्रियंका सिंह के द्वारा निजी कंपनी का प्रमोशन करने का वीडियो सामने आया था. इसमें यह भी दिखाया जा रहा था कि किस तरीके से उनके द्वारा निजी कंपनी में काम करने के बाद लाखों रुपए महीना कमाया जा रहा है. प्रमोशन के दौरान स्वास्थ्य विभाग के सरकारी फोटो और वीडियो का भी उपयोग किया गया था, सब कुछ स्पष्ट होने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने से सरगुजा संभाग के तमाम अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहा है.

सरगुजा में स्वास्थ्य विभाग की हालत बहुत खराब

यही वजह है कि सरगुजा में स्वास्थ्य विभाग की हालत बहुत खराब है अधिकतर समय स्वास्थ्य केंद्रों में ताला लटकता हुआ दिखाई देता है तो कई बार कर्मचारी स्वास्थ्य केंद्रों का ताला खोलने के बाद लापता रहते हैं माना जा रहा है कि इसके पीछे भी यही वजह है कि लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों के द्वारा खुली छूट देकर रखी गई है. मतलब सरगुजा में सरकारी स्वास्थ्य सुविधा के माध्यम से अगर आम इंसान की जिंदगी ग्रामीण इलाकों में बच रही है तो वह सिर्फ और सिर्फ भगवान भरोसे.

सीएमएचओ ने सस्पेंड करने के बजाय सिर्फ रोक दो-दो इंक्रीमेंट

मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर पीएस मार्को ने बताया कि जांच में दोनों स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है हालांकि नियम के मुताबिक दोनों को निलंबित किया जा सकता था लेकिन कर्मचारियों की कमी को देखते हुए उनका दो-दो इंक्रीमेंट रोका जा रहा है. इस पूरे मामले की फाइल कलेक्टर के पास भेज दी गई है. डां. मार्को ने बताया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि अगर सीधे तौर पर सस्पेंड कर दिया जाता तो फिर वहां पर काम करने के लिए कर्मचारी नहीं मिलेंगे. इससे पहले पूर्व कलेक्टर के द्वारा उदयपुर इलाके में कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी और उन्हें निलंबित किया गया था, उसके बाद वहां कर्मचारियों की कमी हो गई थी और आज भी वहां कर्मचारी नहीं है इसीलिए फिलहाल दोनों का दो-दो इंक्रीमेंट रोका गया है.

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