बलरामपुर के परिवार का 20 सालों से सामाजिक बहिष्कार, बच्चों की शादी भी नहीं हो पा रही, जानें क्या है मामला

CG News: गांव वाले भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि इन्हें समाज से बहिष्कृत किया गया है. पूरा परिवार 20 सालों से इस बहिष्कार का दंश झेल रहे है. पीड़ित परिवार ने समाज से विनती भी की समाज के बैठक में भी शामिल हुए पर बैठक में मोबाइल बंद कर दिया गया
balrampur family faces social boycott for 20 years

बलरामपुर: परिवार का 20 सालों से सामाजिक बहिष्कार

CG News: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां एक परिवार पिछले 20 सालों से सामाजिक बहिष्कार का दर्द झेल रहा है. वजह सिर्फ इतनी कि उन्होंने कथित तौर पर ढाई सौ रुपए का सामाजिक जुर्माना नहीं भरा. अब हालात ऐसे हैं कि परिवार के बच्चों की शादी तक नहीं हो पा रही है.

क्या है पूरा मामला?

ये मामला शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के आमगांव का है. जहां रहने वाला महाबीर प्रसाद गुप्ता का परिवार बीते दो दशकों से समाज से अलग-थलग कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि एक सामाजिक बैठक में शामिल न होने पर परिवार पर 250 रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया था, जिसे न चुकाने पर पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया गया.

समय बीतता गया लेकिन बहिष्कार खत्म नहीं हुआ. अब इस फैसले का असर परिवार की नई पीढ़ी पर पड़ रहा है. बच्चे बड़े हो चुके हैं लेकिन उनकी शादी की बात जहां भी चलती है, समाज से बहिष्कृत होने की खबर पहले ही पहुंच जाती है और रिश्ते टूट जाते हैं.

पीड़ित परिवार ने किया निवेदन

गांव वाले भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि इन्हें समाज से बहिष्कृत किया गया है. पूरा परिवार 20 सालों से इस बहिष्कार का दंश झेल रहे है. पीड़ित परिवार ने समाज से विनती भी की समाज के बैठक में भी शामिल हुए पर बैठक में मोबाइल बंद कर दिया गया और उन्हें बाहर निकाल दिया गया पीड़ित द्वारा उसे दौरान का वीडियो भी बना लिया है.

परिवार ने पुलिस से शिकायत की

पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत थाने में भी की लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब परिवार न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर काट रहा है. कानून के जानकारों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना गैरकानूनी माना जा सकता है. यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. ऐसे मामलों में प्रशासन को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी चाहिए.

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सवाल यह है कि आखिर 250 रुपए के विवाद ने कैसे एक पूरे परिवार की जिंदगी पर 20 साल का ग्रहण लगा दिया और कब मिलेगा इस परिवार को न्याय? फिलहाल देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या इस परिवार को समाज में दोबारा सम्मान के साथ जगह मिल पाएगी या नहीं.

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