CG News: मनरेगा घोटाला मामले में पूर्व CEO समेत 8 अधिकारियों पर कार्रवाई, 18 साल बाद 6000 पन्नों की चार्जशीट पेश
सांकेतिक तस्वीर
CG News: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) (इसे अब विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (VB G RAM G) कहा जाता है) में वित्तीय अनियमितता मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है. कांकेर स्थित विशेष अदालत में ईओडब्ल्यू ने सोमवार (27 जुलाई) को 8 आरोपियों के खिलाफ 6000 पन्नों की रिपोर्ट पेश की है. ये एक्शन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किया गया है. बताया गया है कि अधिकारियों ने नियमों के विरूद्ध जाकर खरीदारी की.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, EOW के मुताबिक साल 2006-07 और 2007-08 के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रहे केपी देवांगन ने जिला स्तर पर केंद्रीकृत खरीदी कराई. ये प्रक्रिया नियमों के विपरीत थी. शासन के नियमों के मुताबिक सामग्री खरीदने का अधिकार जनपद और ग्राम पंचायतों को है. जांच में सामने आया है कि फ्लेक्सी बोर्ड, मस्टर रोल सत्यापन पत्रक, रोजगार गारंटी योजना मार्गदर्शिका, रोजगार उपलब्धता पंजी, फ्लेक्सी कोबरा फाइल कवर और श्रमिक जानकारी पत्रक समेत कई सामग्रियों की खरीदी की गई. ये सभी खरीदी छत्तीसगढ़ पंचायत नियम, भंडार क्रय नियम और दूसरी सरकारी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया.
किन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई?
EWO ने लगभग 18 साल बाद 8 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की. इन अफसरों में राधाकांत कर (जनपद पंचायत कांकेर), गोवर्धन गजबल्ला (नरहरपुर), परदेशी राम मरकाम (चारामा), भारत राम नेताम (अंतागढ़), रामकिशन ध्रुव (कोयलीबेड़ा), जीआर ठाकुर (भानुप्रतापपुर) और संवालदास बघेल (दुर्गकोंदल) के नाम हैं.
1.69 करोड़ का मामला आया सामने
बताया जा रहा है कि 1.69 करोड़ रुपये की शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया. कांकेर में 39 लाख, कोयलाबेड़ा में 51 लाख, चारामा में 22 लाख, नरहरपुर में 20 लाख, अंतागढ़ में 19 लाख, कांकेर में 7 लाख, भानुप्रतापपुर में 4 लाख और दुर्गकोंदल में 1.72 लाख रुपये के आर्थिक अपव्यय का मामला सामने आया है.