बिलासपुर के मल्हार में मिला 3 किलो वजनी 2000 साल पुराना ताम्रपत्र, एक्सपर्ट बोले- बौद्ध प्रभाव के संकेत मिले

Bilaspur Copper Plate: यह ताम्रपत्र मल्हार निवासी संजीव पांडे के घर मिला है. ज्ञान भारत योजना के तहत पांडुलियों की खोज कर रही टीम रविवार को बिलासपुर पहुंची थी. इस अभियान के तहत 494 लोग अलग-अलग जगह पुराने दस्तावेज ढूंढ रहे हैं.
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बिलासपुर: मल्हार से मिला 2000 साल पुराना ताम्रपत्र

Bilaspur Copper Plate: छ्त्तीसगढ़ के बिलासपुर की ऐतिहासिक नगरी मल्हार में 2000 साल पुराना 3 किलो का ताम्र पत्र मिला है. इसमें ब्राह्मी लिपि में लिखावट है. विशेषज्ञों के अनुसार ताम्रपत्र में प्राचीन प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सामाजिक ढांचे की जानकारी मिल रही है. ज्ञान भारतम् योजना के तहत यह महत्वपूर्ण खोज हुई है.

एक्सपर्ट – इलाके में बौद्ध प्रभाव के संकेत

यह ताम्रपत्र मल्हार निवासी संजीव पांडे के घर मिला है. ज्ञान भारत योजना के तहत पांडुलियों की खोज कर रही टीम रविवार को बिलासपुर पहुंची थी. इस अभियान के तहत 494 लोग अलग-अलग जगह पुराने दस्तावेज ढूंढ रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक ब्रह्म लिपि सबसे प्राचीन प्रशासनिक व्यवस्थाओं का एक अच्छा उदाहरण है जिसका इस्तेमाल मौर्य काल में हुआ है. ऐसे में इस ताम्रपत्र की मिलने से क्षेत्र में बौद्ध प्रभाव के संकेत भी मिल रहे हैं.

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धार्मिक संस्थाओं को मदद का ब्यौरा

यह ताम्रपत्र इसलिए भी खास है क्योंकि प्राचीन काल में यह महत्वपूर्ण दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल होता था. जमीनों के दान राजाओं के बड़े आदेश और धार्मिक संस्थाओं को दी गई मदद का ब्यौरा भी इसी पर लिखा जाता था इसलिए ताम्रपत्र खास है. भारतम अभियान के अधिकारी संदीप अग्रवाल कहते हैं कि यह खोज सिर्फ छत्तीसगढ़ के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह समझ आता है कि हमारा इतिहास कितना गौरवशाली और समृद्ध रहा है.

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